बरेली: कम बजट में कैसे होगी कुपोषण से जंग

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली,अमृत विचार। गर्भवती महिलाओं, धात्रियों और अति कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने की कवायद शुरू हो गई है। लेकिन कुपोषण से जंग की तैयारी जिस तरह से की गई है। उससे नहीं लगता है कि इसमें सुधार की गुंजाइश होगी। वजह है कि कम बजट। हालात यह है कि अब तक सूखे राशन के वितरण …

बरेली,अमृत विचार। गर्भवती महिलाओं, धात्रियों और अति कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने की कवायद शुरू हो गई है। लेकिन कुपोषण से जंग की तैयारी जिस तरह से की गई है। उससे नहीं लगता है कि इसमें सुधार की गुंजाइश होगी। वजह है कि कम बजट। हालात यह है कि अब तक सूखे राशन के वितरण की व्यवस्था भी दाल का बजट तय न होने के कारण शुरू नही हो सकी है।

बरेली में 6300 से अधिक बच्चे अति कुपोषण और 23000 से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर 52446 धात्री और गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं। इनके अलावा 9648 किशोरी हैं। इनकी सेहत सुधारने के लिए शासन ने सूखे राशन की व्यवस्था की है। इसमें सूखा पाउडर और घी भी दिया जाएगा। साथ ही बच्चों को दाल भी खाने को मिलेगी।

दाल का मूल्य शासन स्तर से काफी कम रखा गया है। शासन स्तर से दाल का मूल्य 60 से 65 रुपये तक ही बताया गया है। इतनी कम कीमत में आखिर दाल कैसे मिलेगी। यह सवाल है। दाल खरीद के लिए स्वयं सहायता समूहों की सहायता ली जाएगी। कीमत कम होने के कारण किसी भी स्वयं सहायता समूह ने अभी तक इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। वजह है कि दाल का मूल्य कम होने के कारण कोई सामने नहीं आ रहा है।

तीन माह में एक बार मिलेगा घी
सेहत सुधारने का सरकार का फार्मूला फेल होता नजर आ रहा है। एक माह के लिए किशोरियों और, गर्भवती महिलाओं और तीन माह से छह वर्ष तक के बच्चों को 450 ग्राम घी दिया जाएगा। वह भी तीन माह में एक बार ही मिल सकेगा। इसी तीन माह में किशोरी और गर्भवती, व धात्री महिलाओं को 750 सूखा पाउडर दिया जाएगा। अब सवाल है कि तीन माह में घी और इतनी कम मात्रा में मिलने वाले दूध से सेहत कैसे सुधरेगी।

राशन की भी मात्रा है कम
गर्भवती, धात्री और किशोरियों के साथ भी सूखे राशन के नाम पर खिलवाड़ हो रहा है। शासन के निर्देशों के मुताबिक गर्भवती, किशोरी और धात्री महिलाओं को प्रति माह दो किलो गेहूं, 1.5 किलो ग्राम चावल दिया जाएगा। इसी तरह 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को 1.5 किलोग्राम गेहूं और एक किलो चावल दिया जाएगा। वहीं, अति कुपोषित बच्चों को 2.5 किलोग्राम गेहूं, 1.5 किलोग्राम चावल दिया जाएगा। इन्हें 900 ग्राम घी दिया जाएगा।

“दाल की खरीद के लिए स्वयं सहायता समूहों से मदद ली जाएगी। शासन स्तर से दाल का मूल्य 60 रुपये से 65 रुपये तक है। अब तक कोई स्वयं सहायता समूह वितरण के लिए आगे नहीं आया है।”
-डॉ. आरबी सिंह डीपीओ

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