बरेली: अनाथ बच्चों का साथ देने को लोगों ने बढ़ाए मदद के हाथ
बरेली,अमृत विचार। मां ने अपना आंचल हटा लिया तो पिता ने अपना हाथ छुड़ा लिया। परिवार के होने बाद भी अनाथों की जिंदगी जीने को मजबूर बच्चों की खबर को जब अमृत विचार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो शहर के तमाम लोगों ने उनकी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ा दिए। उनका कहना था …
बरेली,अमृत विचार। मां ने अपना आंचल हटा लिया तो पिता ने अपना हाथ छुड़ा लिया। परिवार के होने बाद भी अनाथों की जिंदगी जीने को मजबूर बच्चों की खबर को जब अमृत विचार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो शहर के तमाम लोगों ने उनकी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ा दिए।
उनका कहना था कि दिवाली के त्योहार में बच्चों को यह नहीं लगना चाहिए कि उनका कोई नहीं। शहर के तमाम लोग उनके साथ उनके परिवार की तरह ही है। जिस तरह हर घर के बच्चे दिवाली मनाते है ठीक उसी तरह यह बच्चे भी दिवाली मनाएंगे। इतना ही नहीं शहर के छोटे मासूमों ने भी बच्चों की मदद की है।
अमृत विचार ने 12 नवंबर के अंक में इन अनाथ बच्चों की खबर को ‘मां ने छीना आंचल, पिता ने हाथ छुड़ाया, बेबसी ने मासूमों को अनाथ बनाया’ शीर्षक से प्रकाशित किया था। इस खबर को पढ़ने के बाद राजकीय हाई स्कूल तालगौटिया के प्रधानाध्यापक सुभाष चंद्र मौर्या अनाथालय पहुंचे। उन्होंने बच्चों को मिठाइयां, पटाखे, खील-खिलौने समेत तमाम चीजें बच्चों को दी।
रोटी बैंक के अध्यक्ष डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी भी बच्चों की मदद के लिए मिठाइयां, मोमबत्तियां, दीये, खील, बताशे और बच्चों के पढ़ने-लिखने के लिए कॉपी पेन लेकर पहुंच गए। उन्होंने अमृत विचार की इस मुहिम को अच्छा बताया। इसी के साथ अन्य समाजिक संस्थाएं भी पहुंची।
मासूमों ने जेबखर्च बचाकर किया दान
प्रेमनगर की आठ वर्ष की रात्रि निशा सिंह ने जेबखर्च से 1000 रुपये बच्चों को दान किए। उनकी मां मंजीत कौर ने बताया कि खबर पढ़ने के बाद उसने पूछा कि जब यह अनाथ हैं तो इनकी दिवाली कैसे मनेगी। वहीं, सेटेलाइट की रहने वाली राही सक्सेना ने जेबखर्च से 500 रुपये बच्चों के लिए दान में दिए।
