Allahabad High Court's decision : दुष्कर्म के अपराध को शादी के प्रस्ताव से सुधारा नहीं जा सकता

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अमृत विचार, प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यौन शोषण पीड़िता से विवाह करने का प्रस्ताव रखने वाले आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि शादी का झूठा वादा करके यौन शोषण करना एक निंदनीय अपराध है। इस तरह के आचरण से पीड़िता को अपूरणीय भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक क्षति पहुंची है। इस तरह के दुष्कृत्य को बाद में शादी का प्रस्ताव देकर सुधारा नहीं जा सकता है।

कानून ऐसे मामलों में समझौता स्वीकार करने के लिए अनुमति नहीं देता है, जहां यौन शोषण और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध किए गए हों। उक्त आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की एकलपीठ ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपी करार याची को जमानत देने से इनकार करते हुए पारित किया। याची पर आरोप है कि पीड़िता के साथ सगाई करने के बाद उसने उसके साथ सात महीने तक शारीरिक संबंध बनाए और उसके बाद शादी करने से इनकार कर दिया। सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याची के इस कृत्य के कारण पीड़िता और उसके परिवार को गंभीर मानसिक आघात पहुंचा है।

इसके अलावा कोर्ट को यह भी बताया गया कि याची के खिलाफ पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 और शस्त्र अधिनियम, 1959 के तहत दर्ज मामले भी शामिल हैं। याची के आपराधिक इतिहास को देखते हुए उसे जमानत देना उचित नहीं होगा। अंत में कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि भले ही याची अब पीड़िता से विवाह करने के लिए तैयार है, लेकिन उसने न केवल पीड़िता की शारीरिक अखंडता और गरिमा का उल्लंघन किया बल्कि उसकी भावनात्मक कमजोरियों का भी फायदा उठाया, जो अक्षम्य है।

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