बाघ की दहशत :  Rescue Operation के निरीक्षण में पहुंचे वनमंत्री, बाघ के नए पगचिन्ह को देख दिये यह खास निर्देश

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Edited By Amrit Vichar
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मलिहाबाद, अमृत विचार : मलिहाबाद सर्किल के रहमानखेड़ा जंगल से सटे करीब 50 से भी ज्यादा गांवों में बाघ की दहशत कायम है। अब तक 15 मवेशियों का शिकार करने के बाद बाघ खुलेआम घुम रहा है। वहीं, बाघ को पकड़ने के लिए वनविभाग की सारी रणनीति फेल हो रही है। गुरुवार को वनमंत्री डॉ. अरुण सेक्सना रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लेने पहुंचे। इस दौरान बाघ के नए पगचिन्हों को देख वनमंत्री ने रेस्क्यू टीम को बाघ को सुरक्षित पकड़ने का निर्देश दिये हैं। इसके साथ ही वनमंत्री ने बाघ प्रभावित गांवों की जानकारी भी ली है।

वनमंत्री का निरीक्षण

 बाघमित्र बनकर वन विभाग का करें सहयोग

प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) सितांशु पाण्डेय के मुताबिक, गुरुवार सुबह करीब 10 बजे वनमंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने रहमानखेड़ा संस्थान में वन्य जीव रेस्क्यू आपरेशन का निरीक्षण किया। बाघ को रेस्क्यू करने के लिए मचान, ट्रैपिंग केज, कैमरा ट्रैप, लाइव सीसीटीवी कैमरा आदि का जायजा लिया। इसके बाद वनमंत्री ने सीआईएसएच परिसर में बने कमांड सेंटर और कंट्रोल रूम का अवलोकन किया। डीएफओ ने बताया कि वनमंत्री ने  पोर्टेबल मचान एवं ओपन बेट की प्रक्रिया की सराहना करते बाघ को सुरक्षित रेस्क्यू करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही वनमंत्री ने ग्रामीणों से आग्रह किया कि सभी बाघमित्र बनकर वन विभाग की टीम का सहयोग करें।

कमाण्ड सेंटर वनमंत्री

बेहता नाले किनारे मिले नये पगचिन्ह

 दरअसल, रहमानखेड़ा के सीआईएसएच परिसर जोन-एक में पड़वा का 15वां शिकार करने के बाद बाघ वहां से भाग निकला। बुधवार को सीआईएसएच परिसर से 10 किलोमीटर की दूरी पर बेहता नाले के किनारे बाघ के नये पगचिन्ह मिले हैं। बता दें कि ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुंची वनविभाग की टीम ने पगचिन्हों की जांच कर बाघ की मौजूदगी साझा की। इसके बाद वनविभाग ने ड्रोन की मदद से बाघ को ढूंढने का प्रयास किया। बावजूद इसके बाघ का कहीं नामोनिशान नहीं मिला। डीएफओ सितांशु पाण्डेय ने बताया कि मीठेनगर गांव में बाघ को पकड़ने के लिए एक पिंजरे में बकरी को बांधा गया है।

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