जजों और कोर्ट की कमी से परेशान हाईकोर्ट, जनहित याचिका की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायमूर्ति को भेजा

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रदेश में न्यायालयों की कमी पर चिंता जतायी है। न्यायालय ने इस विषय को जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करते हुए मामले की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायमूर्ति के समक्ष भेजने का आदेश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने बहराइच निवासी कृष्ण चंद्र सिंह की शीघ्र निस्तारण की मांग वाली याचिका पर पारित किया है। याची की एक पुनरीक्षण याचिका बहराइच की सेशंस कोर्ट के समक्ष 14 वर्षों से लम्बित थी। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने शीर्ष अदालत द्वारा इम्तियाज अहमद मामले में दिए गए निर्देशों के क्रम में अदालतों के गठन की स्थिति का ब्यौरा राज्य सरकार से तलब किया। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता कुलदीप पति त्रिपाठी व अपर शासकीय अधिवक्ता राव नरेंद्र सिंह ने न्यायालय को बताया कि वर्ष 2021 में 9149 अदालतों के गठन का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जा चुका है। वहीं न्यायालय ने पाया कि सर्वोच्च न्यायालय 10 लाख व्यक्तियों पर 50 न्यायाधीशों की आवश्यकता जता चुकी है, लेकिन वर्ष 2024 तक यह आंकड़ा प्रति 10 लाख व्यक्तियों पर 25 जज तक भी नहीं पहुंच सका है। न्यायालय ने कहा कि इस सम्बंध में शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए तमाम आदेशों-निर्देशों का पालन अब तक नहीं किया गया है।

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