प्रयागराज : राष्ट्रपिता के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले सरकारी अधिवक्ता को किया बहाल
अमृत विचार, प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में सहायक जिला सरकारी अधिवक्ता (आपराधिक) को उनके पद पर बहस करते हुए कहा कि याची के खिलाफ पूरी कार्यवाही दुर्भावना पूर्ण है। याची को पैनल से बाहर करने के लिए ऐसी और स्पष्ट सामग्री को आधार बनाया गया है, जिसकी प्रमाणिकता जांच रिपोर्ट में भी स्थापित नहीं की गई। ऐसी कार्यवाही याची के हितों के लिए नुकसानदेह है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि पूरी कार्यवाही जांच रिपोर्ट पर आधारित है। इसके अलावा याची को जांच समिति के समक्ष अपना बचाव करने का अवसर भी नहीं दिया गया और ना ही किसी भी बिंदु पर वीडियो की प्रमाणिकता की जांच की गई। कोर्ट ने यह भी पाया कि जांच रिपोर्ट की पूरी सामग्री यह दर्शाती है की वीडियो जिसे कथित तौर पर जांच समिति के समक्ष प्रदर्शित किया गया, उसमें स्रोत का उल्लेख नहीं किया गया है की वीडियो को किसने रिकॉर्ड किया और जांच समिति तक वह कैसे पहुंचा।
उक्त आदेश न्यायमूर्ति शेखर भी सराफ और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने राजपाल सिंह दिशावर की याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किया और विशेष सचिव, विधि विभाग द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट, हाथरस द्वारा पारित आदेश को रद्द करते हुए संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि याची को तीन सप्ताह के भीतर उनके पद पर हाथरस में बहाल किया जाए।
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