Mahakumbh: अधिकांश लोगों ने महाकुंभ में लगाई डुबकी, कुछ ने कुंभ जल से किया स्नान; उन्नाव के लोग जत्थों में रवाना हुए थे...

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Published By Nitesh Mishra
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उन्नाव, (अमन सक्सेना)। 13 जनवरी से शुरू हुए महाकुंभ नगर में स्नान को लेकर गंगाघाट क्षेत्र के लोगों में विशेष उत्साह देखा गया। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों लोग अमृत स्नान के अलावा अन्य दिनों में भी गंगाजल में डुबकी लगाने के लिए जत्थों के रूप में रवाना हुए। महाकुंभ के दिव्य और भव्य आयोजन की यादें अब सोशल मीडिया पर भी छाई हुई हैं, जहाँ लोग अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।  

इस वर्ष 144 साल बाद पड़े महाकुंभ का महत्व और भी बढ़ गया था, जिसके चलते नगर के हर वर्ग के लोग इसमें भाग लेने के लिए उत्साहित नजर आए। 45 दिनों तक चलने वाले इस महाकुंभ के दौरान गंगाघाट पर विशेष रूप से स्नान करने के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी। 

शुक्रवार को ’’आपके अमृत विचार’’ ने नगर के कई मोहल्लों में जाकर इसकी पड़ताल की, तो यह पता चला कि लोग अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों के साथ महाकुंभ में स्नान करने गए थे। इस दौरान कुछ ऐसे परिवार भी थे, जो आर्थिक समस्याओं या भारी भीड़ के कारण महाकुंभ नहीं जा सके, लेकिन उन्होंने पास-पड़ोस से गंगा जल मंगवाकर घर पर ही स्नान किया और हर-हर गंगे के जयघोष लगाए। 

शक्ति नगर निवासी विशाल कश्यप, सचिन सविता के अलावा प्रांकुल कश्यप, शिवम श्रीवास्तव, बब्लू कश्यप और अन्य मोहल्लों के निवासियों ने बताया कि उन्होंने अपने-अपने घरों में दर्जनों लोगों के लिए गंगा जल लेकर आये, जहां उनके पड़ोसियों ने उसी जल स्नान कर महाकुंभ स्नान कर पुण्य कमाया। 

महाकुंभ के इस अद्भुत आयोजन ने नगरवासियों को धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से एकजुट किया। इस दौरान लोगों ने गंगा जल के महत्व को समझा और इसका सदुपयोग किया, जो आने वाले समय में यादों के रूप में जीवित रहेगा।

प्रथम यज्ञ भूखंड धरा पर खूब बनी रील

सोशल मीडिया पर नगर के लोगों ने महाकुंभ में स्नान करने के बाद प्रथम यज्ञ भूखंड धरा गाने पर खूब रील बनाई। इस गाने के साथ स्नान करने का आनंद और महाकुंभ की भव्यता को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि पर साझा किया गया, जिससे इस आयोजन की महत्ता को और भी बढ़ाया गया।

अमृत स्नानों पर नगर के घाटों पर भी उमड़ा था सैलाब

पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघ पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के दिनों में नगर के घाटों पर भारी भीड़ देखी गई थी। इन दिनों लोग गंगा में स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे, और महाकुंभ के महत्व को महसूस किया।

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