मुरादाबाद: सुरक्षा के नाम पर महानगर में अघोषित कर्फ्यू, फंसे रहे लोग

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मुरादाबाद, अमृत विचार। रविवार को महानगर में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के आगमन ने एक ओर जहां गरीबों के मुंह से निवाला छीन लिया वहीं आम लोगों को जाम आदि ने भी बहुत परेशान किया। राज्यपाल के लिये तो पुलिस प्रशासन की ओर से सड़क को खाली कराकर काफिला निकाला गया। लेकिन, आम जनता से पुलिस …


मुरादाबाद, अमृत विचार। रविवार को महानगर में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के आगमन ने एक ओर जहां गरीबों के मुंह से निवाला छीन लिया वहीं आम लोगों को जाम आदि ने भी बहुत परेशान किया। राज्यपाल के लिये तो पुलिस प्रशासन की ओर से सड़क को खाली कराकर काफिला निकाला गया। लेकिन, आम जनता से पुलिस प्रशासन को कोई सरोकार नहीं था। जाम में फंसी एंबुलेंस में कोई बीमारी से जूझ रहा था, तो कोई जरूरी काम से जाने के लिये जाम में फंसकर राज्यपाल को कोस रहा था। वहीं रोज कमाने-खाने वालों पर भी पुलिस का डंडा जमकर चला। शहर से लेकर पाकबड़ा तक पुलिस ने शनिवार की रात ही 500 से अधिक दुकानें बंद करा दी थी, जो रविवार को राज्यपाल के जाने के बाद शाम को ही खुल सकी।


रविवार को छुट्टी का दिन महानगर के लोगों के लिये राहत नहीं आफत भरा रहा। दरअसल रविवार को महानगर में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल चार कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंची थी। वह सुबह करीब नौ बजे दिल्ली रोड स्थित सर्किट हाउस में हैलीकॉप्टर से पहुंचीं। इसके बाद दस बजे उनका काफिला पाकबड़ा स्थित यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम के लिये निकलना था। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने दिल्ली रोड से लेकर पाकबड़ा तक करीब 8 किलो मीटर के मार्ग पर छोटी-बड़ी करीब 500 दुकानों को शनिवार की रात ही बंद करने के निर्देश दिये थे।

रविवार को दिन निकलते ही कई लोग चाय, खान-पान सहित सब्जी आदि की दुकाने खोलने पहुंचे तो यहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें धमकाते हुये कहा कि तुम लोगों को पता नहीं, राज्यपाल आ रही हैं। मना करने के बावजूद तुम लोग दुकाने खोलने आ गये। पुलिसकर्मियों के रवैये को देखते हुये दुकानदार दुकानें खोलने से पहले ही बैरंग लौट गये। कुछ लोग दुकानों के आसपास ही खड़े होकर राज्यपाल के जाने का इंतजार करते नजर आये। दोपहर बाद राज्यपाल के जाने के बाद लोगों ने अपनी दुकानें खोली। इसके साथ ही आशियाना रोड, रामगंगा विहार मार्ग पर टायर पंचर से लेकर सब्जी, चाय, पान आदि की दुकानें बंद रहने से लोग परेशान रहे


साहब रोज कमाते हैं और पेट भरते हैं
साहब मेरी चाय की छोटी सी दुकान है, रोज 200-300 रुपये कमाकर अपना घर जैसे-तैसे चलाता हूं। आज दुकान नहीं खोलने दी तो अब घर का गुजारा कैसे होगा। यह शब्द थे टीएमयू गेट के सामने चाय की दुकान लगाने वाले 70 वर्षीय मोहम्मद यासीन के। आंखों में आंसू और लरजते होठों से अपनी व्यथा सुनाते यासीन को देखकर भी पुलिसकर्मियों का दिल नहीं पसीजा। इसके साथ ही बुस, राम, रविंद्र सिंह, हरपाल सिंह, अनिरुद्ध, साहिल, नजर, शादाब रेती, यादराम सिंह, आलम बिरयानी सेंटर, दिल्ली दरबार चिकन आदि लोग के ढाबे एवं टी-स्टालों को बंद कराया गया, जिसके चलते यह लोग भी ऐसी व्यवस्था के कारण राज्यपाल के साथ ही प्रशासन को कोसते नजर आये। बोले कि हम गरीबों को ही हर बार दबाया जाता है, जबकि हम चुपचाप दो वक्त की रोटी कमाने के लिये चाय व अन्य खाद्य सामग्री बेचते हैं।

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