नगर निगम कर्मी बने अंग्रेजी शाशक, भारतेंदु हरिश्चंद के लोग बने मजलूम भारतीय

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Edited By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: भारतेंदु हरिश्चंद के प्रख्यात नाटक ''भारत दुर्दशा'' में भारत की दुर्दशा के लिए जैसे अंग्रेजी राज और भारतीयों के आलस्य और सामाजिक बुराइयों को जिम्मेदार बताया गया था। ठीक वैसे ही उनके नाम पर बने वार्ड की दुर्दशा के लिए शहर की स्थानीय सरकार कहा जाने वाला नगर निगम एकमात्र ऐसा जिम्मेदार है जो अलीगंज के भारतेंदु हरिश्चंद वार्ड में इसका अनुसरण करता दिख रहा है। इसमें नगर निगम के हिस्से की जो भी जिम्मेदारियां हैं वह इसे पूरा करती नहीं दिखतीं। नाले की सफाई नहीं होती, नाला कचरे से पटा पड़ा है। नालियां उफना रही हैं। इसी का नतीजा है कि गलियों में गंदा पानी भरा रहता है।

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लोगों का आरोप है कि सीवर लाइन उल्टी डाली गई है। इससे बिन बरसात घरों में पानी भरा रहता है। सड़क व गलियों में फैली गंदगी और कूड़े का पहाड़ नगर निगम लगे हैं। ''अमृत विचार, आपके द्वार'' टीम रविवार को वार्ड में पहुंची तो निवासियों का दर्द छलक पड़ा। एक महिला ने कहा, चलो...कोई तो आया सुध लेने... हम लोग तो नगर निगम से तो गुहार लगा कर थक चुके हैं। शायद आपकी खबर से ही नगर निगम अधिकारियों की संवेदना जाग जाए। यह शिकायत किसी एक की नहीं, यहां पर सैकड़ों की संख्या में लोगों ने एक ही बात बताई कि नालियां ओवरफ्लो हैं। गर्मी दस्तक दे चुकी है। एक बार बरसात में यहां आ जाइएगा सिर्फ गंदे नाले का पानी ही दिखेगा। रास्ता और खड़ंजा जगह-जगह से बैठ चुका है। पूरा गंदा तालाब ही नजर आएगा। जोर देती हुई कहती हैं बरसात में आइएगा जरूर...।

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उल्टी बना दी है सीवर लाइन

यहां की तीन चार महिलाएं टीम के सदस्यों को हाथ पकड़कर अपने घर बुला ले गईं। सीवर लाइन दिखाती हुई कहती हैं इसे तकनीकी रुप से ही गलत बना दिया गया है। ऊंचाई वाले इलाके की ओर ढाल बना दी गई। नतीजा घरों में पानी भरा रहता है। लोग परेशान हैं गंदे पानी के लिए रास्ता बनाते-बनाते।

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30 हजार की आबादी का वार्ड

इस वार्ड की आबादी लगभग 30 हजार है। यहां पर मूलभूत नागरिक सुविधाओं की जब हमारी टीम ने पड़ताल की तो नगर निगम के दावे हवाई साबित हुए। हालांकि इस दौरान नगर निगम की कूड़ा उठाने वाली गाड़ी जरुर दिखी जब स्थानीय लोगों से पूछा गया कि कूड़ा वाली गाड़ी तो आई है। तो सभी ने सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि हां आते हैं तीन-चार दिन में, जब कूड़ा सड़ांध मारने लगता है और पूरी सड़क पर फैल जाता है।

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बजबजाती नालियों से उठती रहती बदबू

कुर्सी रोड से जब आप भारतेंदु हरिश्चंद्र वार्ड पुराना हनुमान मंदिर के मुख्य मार्ग पर जाते हैं तभी आपको सड़क किनारे टूटी हुई नालियों में ओवरफ्लो दिखने लगता है। इन नालियों का पानी ठहरा हुआ है, निकासी की व्यवस्था है ही नहीं। यहां के गलियों में भी नालियां ओवरफ्लो है और कई जगह इसके टूटने से गंदा पानी सड़क पर पसरा हुआ है। इसी में से होकर आपको नियमित गुजरना पड़ेगा। नालियों की सफाई करते समय उसका मलबा निकालकर अलग रख दिया जाता है, और फिर वह हफ्तों पड़ा रहता है। आधा-अधूरा मलबा सूखकर फिर से नालियों में ही चला जाता है।

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मंदिर के पास भी गंदगी

मंदिर के पास रहने वाले लोग पूरी तरह चोक हो चुकी नालियां दिखाते हैं। आसपास फैला कचरा दिखाते हुए वह कहते हैं कि कई दिनों से नहीं उठाया गया। पुजारी बताते हैं कि यहां पर मच्छरों की भरमार है। हम अपने घरों और दरवाजे की कितनी भी सफाई कर लें, नालियां तो जर्जर और चोक हैं। गंदे पानी में मच्छर के लारवा पनप रहे हैं। यहां पर सर्वाधिक लोग मच्छर जनित बीमारियों के शिकार हैं। यहां पर प्राचीन हनुमान मंदिर के पास गोशाला भी है। जहां आसपास गंदगी का अंबार है। लगभग गोबर से भरी जमीन पर ही गायों को बैठने पर मजबूर होना पड़ रहा है। आसपास भी कूड़ा-कचरा फैला है जिसे देखकर लगता है कि यहां पर साफ-सफाई हुए अरसा बीत चुका है।

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सड़क जाम की फिर भी नहीं मिला पानी

करीब दो माह पहले तक पेयजल का संकट था। कई-कई दिनों तक नलों में पानी नहीं आ रहा था। लोग टैंकर के भरोसे थे। आजिज आकर लोगों ने डंडईया में सड़क जाम कर दी। उसके बाद पानी आना शुरू हुआ। लेकिन बिजली चली जाए तो जलसंकट खड़ा हो जाता है। सबमर्सिबल यहां पर एक भी नहीं है, ऐसी स्थिति में जब पानी की दिक्कत होती है तो लोग सार्वजनिक नल पर अपनी बाल्टियां लेकर लाइन लगा लेते हैं। ऐसे में कई बार विवाद भी होता रहता है।

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सभासद कभी आते नहीं

यहां के लोगों से जब पूछा गया कि आपने अपनी समस्याएं सभासद को बताई तो लोगों को सभासद के बारे में पता ही नहीं है। कुछ लोगों ने बताया कि बीजेपी के मानसिंह यादव सभासद हैं। लेकिन चुनाव के बाद तो दिखे ही नहीं। हम लोग कई बार नगर निगम में अपनी समस्या दर्ज करा चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती है। समस्याएं जस की तस हैं और लोग भी अब उसे अब अपनी नियति ही मानने लगे हैं। दुर्दशा और दुव्यर्वस्था के साथ समझौता कर चुके हैं।

समस्याओं पर बोले वार्ड के लोग

-लाइट चले जाने पर पूरे वार्ड में पानी की समस्या विकट हो जाती है। लोग पानी के लिए दूर-दराज के इलाकों से पानी ढोने को मजबूर होते हैं। सभासद से पानी की समस्या को दूर कराने के लिए कहा गया। वह झांकने तक नहीं आए। - जयदेवी

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-सफाईकर्मी कभी-कभार ही आते हैं। इसके कारण नालियों का गंदा पानी सड़क पर ही बहता रहता है। लोग इसी से होकर गुजरते हैं। किसी पर गंदे पानी की छींट पड़ गई तो मारपीट होने लगती है। आश्वासन मिलता है, समस्या दूर नहीं होती। -नरेंद तिवारी

-नाले की सफाई न होने के कारण गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। उस पर टूटी-फूटी सड़कें लोगों की दुर्घटना का कारण बन रही हैं। समस्या को दूर कराने के लिए हर जगह गुहार लगाई है। नाला और गंदगी से लोग परेशान हैं। -महेश्वरी तिवारी

-सड़क,पानी और नालियों की सफाई के लिए हर जिम्मेदार का दरवाजा खटखटा चुके हैं। महीनों बीत गये हैं, न कूड़ा सड़कों से कम होता है और न ही गंदे पानी से निजात मिलती है। सड़क और गली में गंदा पानी ही नजर आता है। -अलका अवस्थी

-पूरे वार्ड में सभासद की ओर से पानी की समस्या से निपटने के लिए कोई काम नहीं किया गया है। बड़ी आबादी होने के बाद भी यहां न तो सबमर्सिबल की व्यवस्था की गई है, और न ही पानी की टंकी को रखा गया है। इंतजार करते रहिए पानी का। -आरके तिवारी

-शहर के बीचोबीच इस वार्ड में पानी, सड़क, सफाई और नाला चोक होना मुख्य समस्या है, लेकिन इससे निपटने के लिए किसी ने कोई जिम्मेदारी नहीं निभाई है। इसके चलते यहां के हालात बद से बदतर होते चले गये। -विनय पटेल

-नालियों और सड़क की सफाई न होने के कारण चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। समस्या के निवारण के लिए नगर निगम और सभासद से शिकायत भी की, नतीजा कुछ नहीं निकला। -अयोध्या प्रसाद

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-नाला चोक है। इससे बदबूदार पानी सड़क पर बह रहा है। साथ ही सड़क बनाते समय ढाल का ध्यान नगर निगम कर्मचारियों ने नहीं रखा है। इसके चलते सीवर और नाली का पानी घर में घुस रहा है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। -शालिया बानो

-सफाई न होने के कारण हर गली में कूड़े का ढेर लगा हुआ है। इसके कारण मच्छरों ने जीना मुश्किल कर दिया है। त्योहार पर भी यहां दवा का छिड़काव नहीं होता है। संबंधित अधिकारियों गुहार लगाई। लिखित शिकायत की। पर बात नहीं बनीं। -रिजवान

- सड़क पर बहते सीवर के पानी के कारण यहां से निकलना दूभर हो गया है। हर गली में बदबू फैली हुई है। समस्या का समाधान न तो सभासद करता है, और न ही संबंधित अधिकारी। जाएं तो जाएं कहां। -इमरान

-सीवर और पानी की समस्या के कारण लोग परेशान हैं। इसके चलते संक्रामक रोग से आए दिन कोई न कोई प्रभावित होकर बीमार पड़ जाता है। बावजूद इसके यहां का पुरसाहाल लेने वाला कोई नहीं है। -इरफान

-खाली पड़े प्लाटों में कूड़ा भरा है। इसके कारण बदबू और मच्छरों का आंतक है। गंदगी और बदबूदार पानी के सड़कों पर भराव की वजह से लोगों का निकलना मुश्किल है। शिकायत के बाद भी न तो कूड़ा उठाया ,और न ही दवा का छिड़काव किया। -फरीद

-लोगों के घरों के सामने गंदा, बदबूदार पानी सड़क पर बह रहा है। बरसात में यही पानी घरों में घुस जाता है। कई बार हम लोगों को पानी निकालने के लिए पूरी रात जगना पड़ता है। कई बार शिकायत के बाद भी समस्या को सुधारा नहीं गया। -हनीफ

-कभी-कभार दिखने वाले सफाईकर्मी नाली से कूड़े निकालकर वहीं कूडे़ का ढेर लगा कर चलते बनते हैं। उसे उठाते नहीं हैं। ऐसें में वही कूड़ा फिर नाली में जाकर उसे चोक कर देता है। मारे बदबू और मच्छर के कारण सोना तक मुश्किल हो गया है। कम से कम इस महीने में ही ध्यान दे दें जिम्मेदार। -जमीला

''अमृत विचार आपके द्वार'' की टीम- मार्कण्डेय पांडेय, नीरज अभिषेक, छायाकार प्रमोद शर्मा

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