बरेली: स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिंग बढ़ाने को धरातल पर करने होंगे काम

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अमृत विचार, बरेली। वर्ष 2019 में स्वच्छता की रैंकिंग में बरेली शहर 117वें स्थान पर था। अधिकारी इस बार टॉप 50 में आने की तैयारी करने में टॉप 50 में आने की तैयारी करने में जुटे होने का दावा कर रहे हैं लेकिन सच तो यह है कि धरातल पर काम करने की बजाय कागजों …

अमृत विचार, बरेली। वर्ष 2019 में स्वच्छता की रैंकिंग में बरेली शहर 117वें स्थान पर था। अधिकारी इस बार टॉप 50 में आने की तैयारी करने में टॉप 50 में आने की तैयारी करने में जुटे होने का दावा कर रहे हैं लेकिन सच तो यह है कि धरातल पर काम करने की बजाय कागजों में कार्य पर अधिक जोर दिया गया जिसका परिणाम रहा कि 2020 की रैंकिंग में 149वें पायदान पर आ गया। स्वच्छता सर्वे में शहर में 32 रैंक पीछे पहुंचने के बाद अब 2021 में बेहतर प्रदर्शन करने का अफसर दावा कर रहे हैं। इसके परिणाम एक माह बाद आने वाले हैं लेकिन शहर की पांच से अधिक ऐसी समस्याएं हैं जिस पर अभी भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शहर की कई खाली जगहें कूड़ा स्थल के रूप में तब्दील हो चुकी हैं।

शहर के 80 वार्डों में स्वच्छता सर्वेक्षण में डोर टु डोर कूड़ा उठान कागजों में किया जा रहा है। केवल ऐसे वार्डों में इस योजना का असर दिख रहा है जहां कंपनी को आथिर्क रूप से फायदा है। स्वच्छता सर्वे के लिए आने वाली टीम वार्डों में पहुंच कर लोगों से फीडबैक लेती है। इसमें लापरवाही के कारण सड़कों पर कूड़ा पसरा मिलता है। वहीं, दूसरी तरफ सफाई को लेकर बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। इसके चलते लोगों का फीडबैक खराब जा सकता है। गीला और सूखा कचरा अलग न होने से नंबर कट जाते हैं।

शहर की 76 छोटे-बड़े नालों की सफाई पर इस साल 1.20 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके बाद जलनिकासी की व्यवस्था चकाचक न होने से जलभराव की समस्या से लोगों को जूझना पड़ रहा है। नाले का पानी गली-सड़क पर भरने से गंदगी फैल रही है। इसका भी असर स्वच्छता सर्वेक्षण पर पड़ सकता है। शहर से हर रोज निकले वाले 450 मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण के लिए निगम के पास ठोस उपाय नहीं है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अभी स्थापित नहीं हो पाया है। बाकरगंज में कूड़े का पहाड़ खड़ा है। यहां लगा प्लांट भी कर्मचारियों की कमी के कारण बंद हो चुका है। अभी तक इसे समाप्त करने के लिए केवल निविदा देने का कार्य किया गया है।

शहर ओडीएफ प्लस की श्रेणी में है लेकिन सामुदायिक शौचालयों का उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसका कारण बताया जा रहा है कि सामुदायिक शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं है। इसके साथ ही निर्माण की भी समस्या है। कुछ जगहों पर सामुदायिक शौचालय निर्माणाधीन हैं, इतना हीं नहीं कई जगहों शौचालय पर ताला भी लटक रहे हैं।

सफाई कर्मचारियों की कमी
स्मार्ट सिटी में सफाई के लिए आबादी के हिसाब से करीब 800 सफाई कर्मचारियों की कमी है। इसके चलते सफाई व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। नगर निगम के 80 वार्डों में सफाई व्यवस्था के लिए स्थाई कर्मचारियों के साथ संविदा के सफाई कर्मचारियों की संख्या 1900 है। यह मानक काफी पुराना है। आबादी में 10 गुना बढ़ोतरी हो चुकी है। वार्डों की संख्या भी बढ़ चुकी है। शहर को स्वच्छ करने का दावा करने वाले अफसर कैसे बिना सफाई कर्मचारियों के वार्डों को चकाचक करेंगे। यहां तक कि कई ऐसे वार्ड हैं, जिनकी आबादी 30 हजार तक पहुंच चुकी है लेकिन सफाई कर्मचारी एक-दो हैं।

स्वच्छता सर्वेक्षण- 2021 का चरण शुरू
स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 के लिए शासन ने गाइडलाइन जारी कर दी है। शहर में किस तरह की सुविधा दी जा रही और उसकी प्रक्रिया क्या है, इसका आंकलन तीन-तीन माह की प्रगति देखते हुए किया जाएगा। नई गाइडलाइन के अनुसार, अप्रैल से जून, जुलाई से सितंबर और अक्टूबर से दिसंबर महीनों में सेवा स्तर की प्रगति का त्रैमासिक आंकलन किया जाएगा। हर तीन माह के लिए दो-दो हजार नंबर दिए गए हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण तीन राउंड में होगा। सबसे खास बात यह है कि एक राउंड में भी फेल होने पर सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगी। अब देखना है कि आने वाले परिणाम में क्या होता है।

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