बरेली: अब कोहरे की वजह से नहीं होगा ट्रेन हादसा
अमृत विचार, बरेली। सर्दियों में कोहरे की वजह से होने वाले ट्रेन हादसों को रोकने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल एक नई पहल की है। मंडल की सभी ट्रेनों में फॉग सेफ डिवाइस लगाई है। यह डिवाइस लोको पायलट को कोहरे में नहीं दिखने वाले सिग्नल की स्थिति बताएगी। इससे हादसों का भी …
अमृत विचार, बरेली। सर्दियों में कोहरे की वजह से होने वाले ट्रेन हादसों को रोकने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल एक नई पहल की है। मंडल की सभी ट्रेनों में फॉग सेफ डिवाइस लगाई है। यह डिवाइस लोको पायलट को कोहरे में नहीं दिखने वाले सिग्नल की स्थिति बताएगी। इससे हादसों का भी खतरा टलेगा और ट्रेन अपने निर्धारित समय से स्टेशनों पर भी पहुंच सकेगी। सर्दियां आते ही ट्रेन हादसे और उनकी देरी से पहुंचने की प्रक्रिया शुरू हो जाती हैं, मगर अब ऐसा नहीं होगा। इज्जतनगर मंडल की सभी ट्रेनें अपने निर्धारित समय पर स्टेशनों पर पहुंचेंगी भी और हादसे भी नहीं होगें। इसके लिए मंडल की सभी ट्रेनों में फॉग सेफ डिवाइस लगाई है। पूर्वोत्तर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि यह डिवाइस सेटेलाइट से संचालित होगी। इंजन के अंदर इस डिवाइस को लगाया गया है, जिससे लोको पायलट और सहायक लोको पायलट इस डिवाइस की मदद से सिग्नल का पता लगा सके।
क्या है फॉग डिवाइस
फॉग सेफ डिवाइस एक ऐसा डिवाइस है, जिसे ट्रेनों के इंजन में लगाया जाता है। इससे लोको पायलट को सिग्नल और ट्रैक पर किसी प्रकार के गतिरोध की जानकारी ऑडियो वीडियो सिस्टम के जरिए मिल जाती है। जैसे ही एक स्टेशन से गाड़ी खुलती है, पायलट को अगले स्टेशन का डिस्टेंस की जानकारी मिलने लगती है। डिवाइस से आवाज आती है, साथ ही अगले स्टेशन की दूरी भी पता चलती रहती है। जीपीएस आधारित यह डिवाइस सिग्नल नजदीक आने पर जलने-बुझने के साथ आवाज भी करता है।
पटाखा सिग्नल की भी की जा चुकी है आपूर्ति
इज्जतनगर मंडल के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि फॉग सेफ डिवाइस के साथ ही सभी स्टेशनों पर पर्याप्त मात्रा में पटाखा सिग्नल की आपूर्ति भी की जा चुकी है। इससे कोहरे के समय में लोको पायलट को पटाखों की मदद से सिग्नल की जानकारी दी जा सके।
क्या होता है पटाखा सिग्नल
घनी धुंध व कोहरे के कारण रेलगाड़ियों के ड्राइवरों को ट्रैक पर पड़ने वाले सिग्नल नहीं दिखते। ऐसे में सभी स्टेशन के होम सिग्नल से 270 मीटर पहले ट्रैक के उपर दस-दस मीटर की दूरी पर दो पटाखे लगा दिए जाते हैं। जैसे ही रेल इंजन का भार इन पटाखों पर पड़ता है तो यह जोरदार आवाज के साथ फट जाते हैं। पटाखों की आवाज से ड्राइवर को जानकारी मिल जाती है कि 270 मीटर दूर सिग्नल है।
