बरेली: 50 के फाइक पाम 15 सौ में खरीदे, उद्यान में नहीं जेब में हरियाली
बरेली,अमृत विचार। शहर के सुप्रसिद्ध गांधी उद्यान की हरियाली के साथ मनमानी की जा रही है। इसके कारण उद्यान की खूबसूरती बनने की जगह बिगड़ रही है। पार्क में हरियाली लाने के नाम पर बड़ा खेल किया गया है। जिसके कारण पार्क की जगह जिम्मेदारों की जेब में हरियाली आती नजर आ रही है। इसके …
बरेली,अमृत विचार। शहर के सुप्रसिद्ध गांधी उद्यान की हरियाली के साथ मनमानी की जा रही है। इसके कारण उद्यान की खूबसूरती बनने की जगह बिगड़ रही है। पार्क में हरियाली लाने के नाम पर बड़ा खेल किया गया है। जिसके कारण पार्क की जगह जिम्मेदारों की जेब में हरियाली आती नजर आ रही है। इसके बावजूद भी जिम्मेदार अफसर सजग नहीं है।
कभी ऐसा समय था कि गांधी उद्यान की खुशुब हर किसी को दूर से ही अपनी ओर खींच लेते थी। कई किस्म के गुलाब आर्कषण का केंद्र हुआ करते थे। पर इस समय पूरे परिसर में कही भी काला गुलाब देखने को नहीं मिलेगा। कई ऐसे फूल थे, जो गांधी उद्यान की खूबसूरती पर चार चांद लगाते थे, वह धीरे-धीरे समाप्त होने की कगार पर पहुंच चुके है। नीबू से गुलजार रहने वाले बाग में केवल एक पौधा बचा है। बीच का तालाब पर्यावरण की दृष्टि से काफी महत्तवपूर्ण माना जाता है लेकिन उसका वजूद समाप्त हो गया है।
तालाब कभी बारात के लिए बुक किया जाने लगा था और अब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत फब्बारा, म्यूजिकल सिस्टम लगाया जा रहा है। परिसर में सड़क के किनारे मोरपंख की तरह दिखने वाले पौधे कदम- कदम पर लगाए हैं। इसी बीच नगर निगम के एक साहब में फाइक पाम लगाने की योजना बना डाली। इस पौधे में अधिकत्तर देखने को मिलता है कि फूल नहीं लगता है। केवल पत्तिया है, शोपीस बन कर रह जाती हैं। इसकी खरीदारी में बड़ा खेल गया है, जिस पौधे की कीमत महज 50 रुपये हैं, उसके 15 सौ रुपये में खरीदकर भुगतान किया गया है।
इतना ही नहीं एक मीटर की दूरी में दो पौधे लगा गए है, जिसके कारण इसके पास लगे मोरपंखी के पौधे बौने हो गए है। जिसके वजह से उनका विकास रुक गया है। जबकि दूसरी विभागीय सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो उद्यान की देखभाल करने वाले कर्मचारियों ने करीब छह माह पहले 20 गुलाब के पौधों की मांग की थी। नवम्बर माह में एक बार फिर से 150 गुलाब के पौधों की मांग की गई, ताकि गांधी उद्यान में लगाया जा सके। लेकिन अभी तक उद्यान में लगने वाले गुलाब के पौधों को नहीं खरीदा गया है। वहीं, गांधी उद्यान की नर्सरी में पौधों का दिनोंदिन अभाव होता जा रहा है। बड़े छायादार वृक्षों की कटान होने से छांव का भी अभाव होता जा रहा है।
