Kanpur: ताश के पत्तों जैसी भरभरा सकतीं शहर में तमाम इमारतें, यहां जानें... भूकंप आने पर कैसे करें बचाव?

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कानपुर, अमृत विचार। म्यांमार और बैंकाक में शुक्रवार को आए विनाशकारी भूकंप में कई बहुमंजिली इमारतें ताश के पत्तों की तरह वह गई। सड़कें फट गईं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि अगर ऐसी आपदा का सामना कभी अपने शहर को करना पड़ा तो क्या तैयारी है। यहां तो घने और पुराने मोहल्लों में जर्जर मकानों का जाल फैला है। हर कहीं बिना मानक और भूकंपरोधी संरचना के बहुमंजिली इमारतें और अपार्टमेंट तने खड़े हैं। ऐसे में जान-माल के भारी नुकसान की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।

शहर में आपदा प्रबंधन टीम कितनी जागरुक है, इसे लेकर 'अमृत विचार' ने उप नियंत्रक शिवराज सिंह से बात की। उन्होंने बताया कि सभी मोहल्लों में उनके 1500 सदस्य सक्रिय है, शहर को तीन डिवीजन में बांटा गया है। आपदा के दौरान कैसे लोगों को हॉस्पिटल पहुंचाना है, कैसे प्राथमिक उपचार करना है, कहां ठहराना है, जैसी ट्रेनिंग दी जाती है। दावा है कि समय समय पर मॉक ड्रिल भी की जाती है। 

हालांकि सिविल डिफेंस के पास अपना कोई ऐसा संसाधन नहीं है जिसके जरिए किसी को हॉस्पिटल पहुंचाया जा सके। मॉक ड्रिल कहां और कब होती है, शायद ही किसी को पता हो। इसी तरह फजलगंज फायर स्टेशन के अग्निशमन अधिकारी परमानंद पांडेय ने बताया कि मकान या बिल्डिंग में फंसे लोगों को निकालने की सारी व्यवस्था है। आधुनिक दमकल गाड़ियां हैं। कटर उपलब्ध हैं, जिससे लोहा, दरवाजा, दीवार काटकर फंसे लोगों को बचाया जा सकता है।

भूकंप आने पर ऐसे करें बचाव

• खुले आसमान के नीचे चले जाए।
• लिफ्ट का प्रयोग नहीं करें।
• परिवार के सभी सदस्यों को पानी, बिजली, और गैस जैसी उपयोगिताएं बंद करना आना चाहिए।
• जहां खिड़की के शीशे, तस्वीरों से कांच गिरकर टूट सकता है. फर्नीचर गिर सकता है, वहां से दूर रहें।
• खुले क्षेत्र में बिल्डिंग, पेड़, टेलीफोन खंभा, बिजली की लाइनें, पुलों से दूर रहे।
बाहर हैं तो जितनी जल्दी हो सके, सुरक्षा के साथ वाहन रोक देना चाहिए।

स्कूलों में प्राथमिक चिकित्सा अनिवार्य करें
 
• रेडक्रास सोसायटी के सचिव आरके सफ्फड़ का कहना है कि सभी स्कूलों में प्राथमिक चिकित्सा की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। इस बाबत मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।

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