बरेली: जन औषधि केंद्र में दवाओं का संकट, खरीदनी पड़ रहीं ब्रांडेड दवाएं
अमृत विचार, बरेली। आम आदमी तक सस्ती दवाएं पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए थे। अब इन केंद्रो पर नाममात्र की दवाएं बची हैं। मरीजों को दवा के लिए मेडिकल स्टोरों का रुख करना पड़ रहा है। ऐसे में खर्च भी बढ़ रहा है। लोगों को सस्ती …
अमृत विचार, बरेली। आम आदमी तक सस्ती दवाएं पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए थे। अब इन केंद्रो पर नाममात्र की दवाएं बची हैं। मरीजों को दवा के लिए मेडिकल स्टोरों का रुख करना पड़ रहा है। ऐसे में खर्च भी बढ़ रहा है।
लोगों को सस्ती दवा मुहैया कराने के उद्देश्य से जन औषधि केंद्रों की शुरुआत की गई थी। इसी क्रम में जिला अस्पताल में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोला गया था। इन केंद्रों पर 400 से अधिक तरीके की दवाएं रखने के निर्देश दिए गए थे ताकि आमजन की जेब पर बोझ न पड़े। जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं के दामों में बड़ा अंतर है।
जिला अस्पताल के जन औषधि केंद्र की बात करें तो यहां चार माह से दवाओं का संकट है। संचालक के मुताबिक, यहां सिर्फ 150 दवाओं का स्टॉक रहता है, वह भी अभी पूरा नहीं है। अभी सप्लाई नहीं मिल सकी है। कुछ ऐसा ही हाल दूसरे जन औषधि केंद्र का भी है।
जिला अस्पताल के अधिकांश डॉक्टर मरीजों को जेनेरिक दवाएं नहीं लिखते हैं। ऐसे में मेडिकल स्टोर से दवा खरीदना मरीज की मजबूरी बन जाती है। इसके पीछे कहीं न कहीं ब्रांडेड दवाओं में डॉक्टरों के कमीशन के खेल को जिम्मेदार माना जाता है। जन औषधि केंद्र में दवाओं का स्टॉक न होने से भी दिक्कत रहती है। वर्तमान में औषधि केंद्रों पर विटमिन सी, ए, ग्लिमेप्राइड, टैमसुलोसिन आदि दवाएं नहीं हैं। इनका हर मौसम में अधिक इस्तेमाल होता है।
इन दवाओं की अधिक है कमी
- टैमसुलोसिन
- टैमसुलोसिन 0.4 डस्टाराइड
- इट्राकोनाजोल
- लुलीकोनाजोल 10एमजी
- कैल्शियम
- मल्टीविटामिन
- विटमिन सी
- विटमिन ए
- विटमिन बी
