बरेली: शहर और देहात के बीच झूल रहा कुसुम नगर का विकास
बरेली, अमृत विचार। शहर के पास स्थित कुसुम नगर वैसे तो डोहरा गोटिया गांव का एक मजरा है लेकिन नगर निगम की सीमा से सटा हुआ है। भोजीपुरा विधानसभा क्षेत्र का यह आखिरी गांव है। बिथरी चैनपुर विधान सभा क्षेत्र से सटा हुआ है। कई लिहाज से सीमा क्षेत्र होने के कारण कुसुम नगर के …
बरेली, अमृत विचार। शहर के पास स्थित कुसुम नगर वैसे तो डोहरा गोटिया गांव का एक मजरा है लेकिन नगर निगम की सीमा से सटा हुआ है। भोजीपुरा विधानसभा क्षेत्र का यह आखिरी गांव है। बिथरी चैनपुर विधान सभा क्षेत्र से सटा हुआ है। कई लिहाज से सीमा क्षेत्र होने के कारण कुसुम नगर के विकास पर जन प्रतिनिधियों की नजर नहीं पड़ रही है। यही वजह है कि यहां के बाशिंदे दुश्वारियों के बीच जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं।
डोहरा रोड से महज दो सौ मीटर की दूरी पर कुसुम नगर स्थित है। इसके पास में बिल्डरों ने आलीशान भवनों का निर्माण कर रखा है। कुसुम नगर को जोड़ने वाली सड़क करीब 20 साल से खराब है। जगह-जगह पानी भरा है जिसके कारण लोगों को कीचड़ से होकर आना-जाना पड़ता है। जल निकासी के लिए भी कोइ व्यवस्था नहीं की गई है। यहां रहने वाले लोग विकास की राह देख रहे हैं।
कई बार लोग जन प्रतिनिधियों के साथ ही मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी अपनी समस्या बता चुके हैं। सबसे गंभीर बात तो यह है कि शिकायतों का फर्जी निस्तारण भी कर दिया गया है। इसके कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
“करीब दो दशक से सड़क खराब है लेकिन कई बार शिकायत करने के बाद भी सड़क निर्माण नहीं कराया गया है। ग्राम प्रधान बजट का रोना रोते हैं। उनके हिसाब से सड़क को नगर निगम या अन्य बजट से बनाया जाना है। सड़क खराब होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।” -दिलीप सिंह, सेवानिवृत्त कर्मचारी, डाक विभाग
“मोहल्ले में जल निकासी की व्यवस्था न होने के कारण खाली जगहों पर पानी जमा हो गया है। कच्चे सड़क पर गड्ढा होने की वजह से पानी से हर वक्त भरा रहता है। महज दो सौ मीटर सड़क निर्माण के लिए हम लोग दो दशक से इंतजार कर रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।” -सुरेश पाल, सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी
“जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत की गई लेकिन फर्जी निस्तारण कर दिया गया है। समस्या का समाधान अब तक नहीं हो सका है। सड़क न होने से आवागमन में बहुत दिक्कत हो रही है। पानी लगने से लोग अपने घरों के बाहर तक बैठना नहीं चाहते हैं क्योंकि जलजनित रोग होने का भय रहता है।” -अक्षय कुमार
