बरेली: मौत के मुहाने पर जी रहे खुशहाल जिंदगी
पीयूष दुबे, बरेली। ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी)…। इस बीमारी का नाम सुनते ही हमारे जेहन में दो विचार आते हैं, पहला यह कि यह लाइलाज है और दूसरा यह कि अब कुछ महीनों या वर्षों में मौत निश्चित है। लेकिन यह अधूरा सच है क्योंकि एचआईवी भले ही लाइलाज है लेकिन डॉक्टरों की सलाह से …
पीयूष दुबे, बरेली। ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी)…। इस बीमारी का नाम सुनते ही हमारे जेहन में दो विचार आते हैं, पहला यह कि यह लाइलाज है और दूसरा यह कि अब कुछ महीनों या वर्षों में मौत निश्चित है। लेकिन यह अधूरा सच है क्योंकि एचआईवी भले ही लाइलाज है लेकिन डॉक्टरों की सलाह से नियमित दवाइयां लेने से इसका असर बेहद कम हो जाता है और व्यक्ति सामान्य जीवन जीता रहता है।
वह चंद महीनों ही नहीं बल्कि वर्षों तक सामान्य जिंदगी बसर कर सकता है। यह कहना है एंट्री रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर के चिकित्सा अधिकारी डा. संजीव मिश्रा का। डा. मिश्रा के मुताबिक, इसके लिए मरीज को डॉक्टरों का परामर्श और दवाएं नियमित और तय समय पर लेते रहना चाहिए। डा. संजीव का कहना है कि हजारों की संख्या में मरीज नियमित दवाएं लेकर सामान्य जीवन जी रहे हैं।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में बरेली मंडल में कुल 3643 एचआईवी संक्रमित हैं। इनमें सबसे ज्यादा 1734 संक्रमित बरेली जिले में हैं। इन मरीजों का इलाज बरेली के एआरटी सेंटर से चल रहा है। यहां बता दें कि एचआईवी संक्रमितों के इलाज हेतु बरेली में एआरटी सेंटर की स्थापना 10 अक्टूबर 2012 को हुई थी। यहां न सिर्फ उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बल्कि गैर प्रांतों से भी मरीजों को लाया जाता है। एआरटी सेंटर के डाटा ऑपरेटर मनोज वर्मा के मुताबिक, बरेली में दिल्ली, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र आदि राज्यों के मरीज भी इलाज करा रहे हैं।
मामला- एक
बरेली का पहला मरीज 14 वर्ष से जी रहा सामान्य जीवन
जिले में सबसे पहला एचआईवी संक्रमित वर्ष 2006 में मिला था। पहले उनका इलाज लखनऊ से चल रहा था। जब बरेली में एआरटी सेंटर की स्थापना हुई तो वह बरेली में इलाज कराने लगे। तब से उनका इलाज यहीं चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, अब वह बिल्कुल सही हैं और सामान्य लोगों की तरह जीवन जी रहे हैं।
मामला- दो
एचआईवी संक्रमित 18 वर्ष से जी रहा स्वस्थ जीवन
पीलीभीत जिले का मूल निवासी एक एचआईवी संक्रमित दिल्ली में संक्रमण की जद में आ गया। वर्ष 2002 में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद लंबे समय तक दिल्ली में इलाज कराया। बरेली में जब एआरटी सेंटर की स्थापना हुई तो वह दिल्ली से यहां ट्रांसफर कर दिए गए। 18 वर्षों से वह लगातार इलाज करा रहे हैं और अब तक स्वस्थ हैं।
बरेली में एचआईवी संक्रमितों की मृत्यु दर 6 प्रतिशत
एड्स के मरीजों की राष्ट्रीय स्तर पर मृत्यु दर 5 से 8 प्रतिशत के करीब है जबकि बरेली एआरटी सेंटर के मरीजों की मृत्यु दर करीब 6 प्रतिशत है। इस लिहाज से माना जा सकता है कि बरेली के एआरटी सेंटर में मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है।
अगर बात करें जिलेवार संक्रमितों की संख्या की तो बरेली में 1734, बदायूं में 661, पीलीभीत में 420, शाहजहांपुर में 465 व अन्य जिले या प्रांतों में 363 एचआईवी संक्रमित हैं। कुल मिलाकर इनकी संख्या 3643 है।
