बरेली: ‘बेटियां मां-बाप को बख्शा गया एक नूर हैं’

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बरेली,अमृत विचार। 76वां आले रसूल वामिके निशात के आखिरी दिन कुल की रस्म बड़ी सादगी के साथ अदा की गई। कोरोना के चलते कुल की रस्म में कम संख्या में अकीदतमंद शमिल हुए। देश में अमन-चैन और भाईचारे की दुआ के साथ कोरोना वायरस के खात्मे की दुआ मांगी गई। कुल की रस्म के बाद …

बरेली,अमृत विचार। 76वां आले रसूल वामिके निशात के आखिरी दिन कुल की रस्म बड़ी सादगी के साथ अदा की गई। कोरोना के चलते कुल की रस्म में कम संख्या में अकीदतमंद शमिल हुए। देश में अमन-चैन और भाईचारे की दुआ के साथ कोरोना वायरस के खात्मे की दुआ मांगी गई। कुल की रस्म के बाद तीन रोजा उर्स का समापन हो गया।

खानकाहे वामिकिया निशातिया का 76वां तीन रोजा उर्स का आगाज गुरुवार को हुआ था। शुक्रवार को परचम कुशाई की रस्म अदा की गई थी। शनिवार को कुल के मौके पर सज्जादानशीन ने बताया कि इस्लाम में औरत को तीन शक्लों में देखा गया है। पहली शक्ल में वो बेटी है जिसे अल्लाह के रसूल ने रहमत करार दिया है। दूसरी शक्ल में और औरत को बीवी की शक्ल बताया है और तीसरी शक्ल में मां है।

वहीं, बरेली कॉलेज के प्रोफेसर डा. महमूद हुसैन ने कहा कि सय्यद वामिक मियां का ताल्लुक गौस-ए-आजम से है। मुफ्ती फईम सकलैनी ने कहा कि कुरान की रोशनी में बुजुर्गाने दीन की जिंदगी पर रोशनी डाली है। उसके बाद दोपहर में ठीक 1 बजे कुल की रस्म शुरू हुई जिसमें देश में अमन-चैन और भाईचारे की दुआ मांगी गई।

इस मौके पर मीडिया प्रभारी जावेद कुरैशी, सय्यद हसनैन, सय्यद जीशान, कारी अलाउद्दीन, अनस, समद, आरिफ मालिक, ताहिर, मेराज, हिमायुं, इरशाद अली समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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