बरेली: अस्पताल की लापरवाही कहीं बढ़ा न दे कोरोना के मामले
अमृत विचार, बरेली। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को लेकर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी सर्तकता बरत रहे हैं। अधिकारी किसी भी हाल में जिले में पहले जैसा हाल नहीं होना देना चाहते हैं, जिसको देखते हुए दिल्ली-एनसीआर से आने वाले लोगों की सैंपलिंग की जा रही है, संदिग्धों को डोर टू डोर …
अमृत विचार, बरेली। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को लेकर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी सर्तकता बरत रहे हैं। अधिकारी किसी भी हाल में जिले में पहले जैसा हाल नहीं होना देना चाहते हैं, जिसको देखते हुए दिल्ली-एनसीआर से आने वाले लोगों की सैंपलिंग की जा रही है, संदिग्धों को डोर टू डोर ट्रेस किया जा रहा है। वहीं जिला अस्पताल अपने महकमे के अधिकारियों और जिला प्रशासन के प्रयासों को बेकार करने में तुला हुआ है।
कोरोना का संक्रमण छूने, खांसने, छींकने आदि से फैलता है। इस बीमारी के प्रति केंद्र और प्रदेश सरकार लोगों को लगातार जागरूक रही हैं। बावजूद इसके जिला अस्पताल के अधिकारी, चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ इसके प्रति जागरूक नहीं दिखाई देते हैं। रविवार को जिला अस्पताल में फिर से प्रयोग की गई सिरिंज व अन्य बायोमेडिकल वेस्ट खुले में पड़ा हुआ नजर आया।
इमरजेंसी के नजदीक बने शौचालय के समीप इस बायोमेडिकल वेस्ट को डाला गया है, जहां मरीजों के तीमारदरों का शौचालय में आना जाना लगा रहता है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा अधिक हो गया है। इसके साथ ही जिला अस्पताल में घूम रहे छुट्टा कुत्ते भी परेशानी का सबब बन सकते हैं, क्योंकि ये कुत्ते वार्डों, ओपीडी, इमरजेंसी आदि जगहों पर घूमते रहते हैं। रविवार को छुट्टा कुत्ते बायोमेडिकल वेस्ट में मुंह मारते नजर आए। ऐसे में कोरोना संक्रमण का खतरा और भी अधिक बढ़ गया है।
कोरोना काल में कई बार खुले में मिला बोयोमेडिकल वेस्ट
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब जिला अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट खुले में पड़ा नजर आया है। इससे पहले भी कई बार कोरोना काल में ऐसे हालात दिखे हैं। मामला सामने आने के बाद जिम्मेदार अफसर इसको तुरंत साफ करवा देते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद हालात वैसे ही हो जाते हैं।
