बरेली: शस्त्र लाइसेंस चाहिए तो मंत्री या लखनऊ से कराएं सिफारिश, वरना भूल जाओ

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। अब शस्त्र लाइसेंस बनवाना आसान नहीं रहा। बिना मंत्री या उच्च अधिकारी की सिफारिश के लाइसेंस जारी नहीं किये जा रहे हैं। इस बीच जो अधिकारी, नेता और रसूखदार लोग शस्त्र लाइसेंस बनवाने की तैयारी कर रहे हैं और आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराने में 10 से 15 हजार रुपये खर्च कर …

बरेली, अमृत विचार। अब शस्त्र लाइसेंस बनवाना आसान नहीं रहा। बिना मंत्री या उच्च अधिकारी की सिफारिश के लाइसेंस जारी नहीं किये जा रहे हैं। इस बीच जो अधिकारी, नेता और रसूखदार लोग शस्त्र लाइसेंस बनवाने की तैयारी कर रहे हैं और आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराने में 10 से 15 हजार रुपये खर्च कर रहे हैं, वे एक बात समझ लें।

लाइसेंस के लिये तभी आवेदन करें, जब उनकी कैबिनेट मंत्री या फिर लखनऊ में उच्च ओहदे पर बैठे अधिकारियों से जान पहचान हो। उनकी सिफारिश पर लाइसेंस बनने की उम्मीद की जा सकती है। इससे नीचे किसी नेता और अधिकारी की सिफारिश लाइसेंस बनवाने में काम नहीं आएगी। करीब 4000 आवेदन कलेक्ट्रेट के शस्त्र अनुभाग में धूल फांक रहे हैं।

इसमें सैकड़ों फाइलें वर्ष 2016 से 2018 तक की हैं। जिनका नंबर अभी तक नहीं आया है। ऐसा कोई दिन गुजरता होगा, जिस दिन 15 से 20 लोग अपने आवेदन के संबंध में शस्त्र अनुभाग न पहुंचते हों। कुछ लोग तो ऐसे भी हैं, जो लाइसेंस बनवाने के लिये जेब में रकम लेकर पहुंचते हैं लेकिन कलेक्ट्रेट के बाबू यह अच्छी तरह समझते हैं कि लाइसेंस अब कैसे बन रहे हैं।

कलेक्ट्रेट के सूत्र बताते हैं कि जनवरी से 5 दिसंबर 2020 तक 14 लोगों के शस्त्र लाइसेंस जारी किये गये हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इनमें से किसी व्यक्ति ने कैबिनेट मंत्री, किसी ने डिप्टी सीएम तो किसी ने मुख्य सचिव समेत उच्च ओहदों पर बैठे कई अधिकारियों से सिफारिश कराई है। तब जाकर उनका काम बना है। इसमें सेना के कई उच्चाधिकारियों के लाइसेंस भी शामिल हैं। सूत्रों ने यहां तक बताया कि शहर के एक सत्ताधारी नेता ने मंत्री से सिफारिश कराकर लाइेंसस बनवाया है।

रामपुर गार्डन के दो डॉक्टरों ने लखनऊ में उच्च ओहदे पर बैठे एक अधिकारी से सिफारिश कराते हुये लाइसेंस बनवाए हैं। शस्त्र अनुभाग के बाबू बताते हैं कि बड़ी संख्या में ऐसे आवेदक हैं जो पुलिस रिपोर्ट छह-छह माह बाद बदलवाकर लगवा चुके हैं। क्योंकि, पुलिस रिपोर्ट छह माह तक ही मान्य रहती है लेकिन 2016 में आये शासनादेश के अनुसार आवेदन कभी निरस्त नहीं होता है।

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