इश्क, इम्तिहान और इनाम... एक मदरसा शिक्षक की दास्तान

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गांव की रात में गुम हुआ सन्नाटा, सुबह जब घर टूटा – तब खुली राज की परतें...

बाराबंकी, अमृत विचार : रात के एक बजे, गांव में सन्नाटा पसरा था। सारे दरवाज़े बंद थे... लेकिन एक खिड़की थी जो खुल रही थी- इश्क की। कोई नहीं जानता था कि गांव की 23 वर्षीय युवती, जो हर शाम दरवाज़े पर बैठ कर मोबाइल में व्यस्त रहती थी, किस दुनिया से बातें कर रही थी और वो जो बातें थीं, धीरे-धीरे मोहब्बत बन गई थीं। और मोहब्बत अगर रंग लाए, तो दुनिया की दीवारें भी छोटीं लगने लगती हैं।

एक मासूम दिल, एक सलीके वाला गुरू…
असन्द्रा क्षेत्र के एक मदरसे में पढ़ाने वाला निजामुद्दीन, अयोध्या के रहीमगंज से आता था। उम्र करीब तीस, चेहरा पर शांत नूर। बच्चों को कुरआन सिखाता, लेकिन खुद किसी और ही आयत में खो गया था, मोहब्बत की आयत। गांव की वही युवती, जो अक्सर मदरसे के बाहर झांका करती थी, शायद किसी दिन उसके अंदाज़ में खुदा को नहीं, किसी और को देखने लगी थी।

इश्क के नाम पर गहनों का सौदा : 2 अगस्त की रात, लड़की अपने घर से सोने-चांदी के जेवर और 90 हजार रुपये लेकर ग़ायब हो गई। घरवालों को लगा, शायद कहीं गई है, लेकिन सुबह जब देखा, संदूक भी खाली था, दिल भी। और बेटी भी। उसके भाई को पहले से ही शक था और जब निजामुद्दीन का नाम आया, तो शक यकीन बन गया। शिकायत थाने में दर्ज हुई, और तलाश शुरू। 

पुलिस आई, मोहब्बत गई : असन्द्रा थाने की पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। लड़की और शिक्षक की तलाश जारी है। मामला सिर्फ इश्क का नहीं, भरोसे और घर की इज़्ज़त का भी है।

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