रामपुर: किसान तिरंगा यात्रा में कॉरपोरेट खेती छोड़ो के लगे नारे

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Edited By Amrit Vichar
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रामपुर, अमृत विचार। स्वतंत्रता दिवस को लेकर बुधवार को रामपुर शहर में भाकियू (टिकैत) के कार्यकर्ताओं ने किसान तिरंगा रैली निकाली। इस दौरान शहर की सड़कों पर देशभक्ति नारे गूंजे। वहीं किसानों ने बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत छोड़ो और कॉरपोरेट खेती छोड़ो जैसे नारे लगाए। किसान रैली में युवा भी बाइक रैली के रूप में शामिल हुए। किसानों ने डीएम के जरिए राष्ट्रपति को ज्ञापन भी भेजा।
 
राष्ट्रीय आह्वान पर जिले भर के किसान ट्रैक्टर और दूसरे वाहनों पर तिरंगा लगाकर जिला मुख्यालय पहुंचे। वाहनों का काफिला नैनीताल रोड से हाईवे होकर प्रदेश महासचिव हसीब अहमद के नेतृत्व में बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत छोड़ो और कॉरपोरेट खेती छोड़ो आदि नारे लगाते हुए सिविल लाइंस थाने और आंबेडकर पार्क के सामने से गुजरते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचा। किसानों ने यहां प्रदर्शन कर डीएम के जरिए राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। इससे पहले युवा किसान नेता फहद अहमद के नेतृत्व में युवा प्रदेश कैंप कार्यालय पर एकत्र हुए। इसके बाद बाइक रैली निकाली,जो जौहर रोड होकर गांधी समाधि पहुंची। 

युवाओं ने भी ज्ञापन सौंपा। इसके बाद में युवा माला रोड से शौकत अली रोड होते हुए पुनः कार्यालय पहुंचे। प्रदेश महासचिव हसीब अहमद समेत कई पदाधिकारियों ने इनका स्वागत किया। रैली के दौरान कई मार्गों पर जाम की स्थिति बनी रही। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल तैनात रहा। रैली में जिलाध्यक्ष जगजीत सिंह गिल , जिला प्रवक्ता मंजीत सिंह अटवाल, प्रदेश सचिव दरयाव सिंह यादव, रामबहादुर यादव, मो. तालिब, राजपाल चौधरी, राहत खान, दीपचंद लोधी, जुवैद आलम, मुस्तकीम, मुजक्किर, नरोत्तम, गुरप्रीत अटवाल, मुर्शिद, राशिद चौधरी, खलील अहमद, छिड़ा नेता, प्रमोद यादव, तारिक ख़ान, चन्ना ख़ान, अनमोल पांडे, आनंद पांडे, शुभम, मनजोत सिंह, नवजोत सिंह, वीरेंद्र सिंह, शिवम चौधरी, विशाल चौधरी सहित अन्य किसान मौजूद रहे।

ज्ञापन के मुख्य बिंदु - 
अमेरिका द्वारा थोपे गए 25 प्रतिशत टैरिफ का विरोध किया जाए। प्रोसेस्ड फूड, डेयरी से किसानों की आय और छोटे कृषि व्यवसायों को नुकसान पहुंचेगा। राष्ट्रीय सहकारी नीति नहीं चाहिए। सीटू प्लस 50 प्रतिशत फार्मूले पर सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की गारंटी हो और सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए। समग्र कर्ज माफी हो, माइक्रो फाइनेंस कंपनियों द्वारा उत्पीड़न बंद हो। कानून बनाकर गांवों  में उत्पादक सहकारी समितियों की स्थापना की जाए जो किसान और कृषि श्रमिक परिवारों को बिना ब्याज कर्ज दें सकें। 

बिजली क्षेत्र के निजीकरण का विरोध हो और स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाएं। लंबित बिजली बिल माफ किए जाएं। ग्रामीण क्षेत्र को 18 घंटे  300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए। पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग नीति को अस्वीकार करें। सभी सरकारी पेंशन 10 हजार प्रति लाभार्थी दी जाए। दस साल से पुराने ट्रैक्टर और अन्य डीजल वाहनों  पर प्रतिबंध लगाने की सरकारी नीति अस्वीकार की जाए। वन अधिकार अधिनियम 2006 को लागू किया जाए। उत्तर प्रदेश में प्राथमिक स्कूलों को बंद करने की नीति नहीं चाहिए। पुलिस और प्रशासन द्वारा समर्थित साम्प्रदायिक हिंसा को रोका जाए।

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