वेतन में यह दोहरा मापदंड क्यों... डॉक्टरों को एक समान सैलरी देने को लेकर नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी ने लिखा पत्र
लखनऊ। एमबीबीएस (MBBS) डॉक्टरों के वेतनमान में विसंगति को लेकर उत्तर प्रदेश विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य को पत्र लिखा है। पत्र में डॉक्टरों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के साथ ही कार्यवाही से अवगत कराने को कहा है।
अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य को लिखे पत्र में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शासन के दो वर्षीय अनिवार्य सेवा बांड के अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों (सीएचसी) एवं शासकीय मेडिकल कालेजों में तैनात बांडेड एम.बी.बी.एस. चिकित्सक तैनात किये गये है। वर्ष 2018-2019 बैच के चिकित्सकों को एक कार्य के लिए अलग- अलग वेतन दिया जा रहा है। जैसे शासकीय मेडिकल कालेजों में नियुक्त चिकित्सकों का वेतन 90,000 से 110,000 तक प्रतिमाह दिया जा रहा है। जबकि उसी बैच के चिकित्सक जो सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर तैनात है उन्हें वेतन 50,000 से 60,000 प्रतिमाह दिया जा रहा है।
पत्र में उन्होंने पूछा है कि जब सभी चिकित्सकों का एक समान कार्य है तो वेतन में यह दोहरा मापदंड क्यों किया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि उत्तर प्रदेश शासन के चिकित्सा अनुभाग-4, पांच जून को जारी किये गये निर्देश में बेसिक पे एवं सभी भत्ते समान रूप से प्रदान किये जाने का उल्लेख किया गया है लेकिन जिले के मुख्य चिकित्साधिकारियों के द्वारा उक्त आदेश के विपरीत चिकित्सकों को वेतन आधे से भी कम मानदेय दिया जा रहा है।
लाल बिहारी यादव का कहना है कि इससे चिकित्सकों में आपस में वैमन्स्यता बढ़ेगा जिसका प्रतिकूल असर आमजन पर पडेगा। उन्होंने कहा है कि जब एक बैच के चिकित्सक अपनी-अपनी सेवाएं प्रदेश के शासकीय मेडिकल कालेजों व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर दे रहे है तो उनके बेसिक पे व सभी भत्तों में अन्तर नहीं होना चाहिए। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों (सीएचसी) एवं शासकीय मेडिकल कालेजों में तैनात एम.बी.बी.एस. चिकित्सकों के वेतन में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने को कहा है।
