उर्स-ए-रजवी : दुनिया का सबसे शांतिपूर्ण देश भारत, तरक्की के लिए मिलकर करें काम
बरेली, अमृत विचार। बरेली जो गंगा जुमनी तहजीब की मिसाल पेश करता रहा है। वहां पिछले कुछ वर्षों से त्योहारों पर माहौल तनावपूर्ण हो जाता था, लेकिन इस बार फिर से मुहब्बत की बयार चल पड़ी है। पहले, मुहर्रम पर जोगीनवादा में हिंदू भाइयों ने मुस्लिम समाज पर फूल बरसाए तो कांवड़ यात्रा में मुसलमानों ने कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा की। आला हजरत के उर्स में भी ऐसी तस्वीरें देखने को मिलीं हैं। उलमा ने बुधवार को मंच से भी सौहार्द बढ़ाने और देश की तरक्की के लिए मिल-जुलकर रहने का संदेश आम किया है।
उर्स ए रजवी के मंच से बुधवार को उलमा ने कहा कि दुनिया में सबसे शांतिपूर्ण हमारा देश है, यहां नफरतों की कोई जगह नहीं। हमारा मुल्क विविधता का गुलदस्ता है। इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई जैसे रंगों के फूल हैं। सबको मिलकर मुल्क की तरक्की के लिए काम करना है। मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि सुन्नी-सूफी विचार शांति-एकता का वाहक है। 107वें उर्स ए रजवी में देश के कोने कोने से आए लाखों जायरीन को उलमा ने यह पैगाम दिया। कारी यूसुफ रजा संभली ने सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां का संदेश आम किया। कहा कि इस साल दुनियाभर में पैगंबर-ए-इस्लाम का 1500 साला जश्न मनाया जाएगा। मुसलमान इस मौके पर खुशियां मनाएं, घरों, बाजारों और शहरों को सजाएं। महफिल और सेमिनारों में गैर मुस्लिमों को बुलाकर इस्लाम की सही तस्वीर रखें और अपनों के साथ हम वतन भाइयों को मिठाई और फूल बांटकर खुशियां मनाएं।
धर्म-परिवर्तन की बढ़ती घटनाओं पर जताई चिंता
धर्म-परिवर्तन की बढ़ती घटनाओं को लेकर उलमा की चिंता भी दिखी। मुफ्ती तौहीद और मुफ्ती जीशान ने कहा कि अपनी बेटियों की अच्छी परवरिश करें। बेटियों के कदम बहकने का बड़ा कारण महंगी शादियां हैं। निकाह आसान बनाएं। शिक्षा के लिए अच्छे स्कूल-कॉलेज खोलें। उलमा ने कहा कि बरेलवी कोई फिरका नहीं, बल्कि ये पैगम्बर-ए-इस्लाम का मिशन है। मुफ्ती सलमान अजहरी ने कहा कि आला हजरत के दीवाने आप भी हैं और मैं भी दीवाना हूं। इस वक्त आप लोग अपनी दीवानगी पर काबू रखते हुए मसलक-ए-आला हजरत की शिक्षाओं पर अमल करते हुए इस मिशन को पूरी दुनिया में पहुंचाएं।
उलमा बोले, इस्लाम खतरे में नहीं
उर्स ए रजवी के मंच से उलमा ने अपनी तकरीर में कहा कि बरेली की हर सड़क पर आला हजरत के दीवानों का जन सैलाब है। अमेरिका के राष्ट्रपति, भारत के प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी देख रहे होंगे। आला हजरत से लोगों की मोहब्बत यह दिखाती है कि इस्लाम न कल खतरे में था, न आज खतरे में है और न कल खतरे में रहेगा। मौलाना मुख़्तार बहेड़वी ने मुसलमानों के जुलूस में बजते डीजे पर सख्त मजम्मत करते हुए आने वाले जुलूस-ए-मोहम्मदी व मुसलमानों के घरों में खुशी के मौके डीजे पर सख्ती से रोक लगाने को कहा। पटना से मुफ्ती डॉक्टर मुमताज आलम ने कहा कि आला हजरत ने हमारे ईमान और अकीदे की हिफाजत फरमाई।
उर्स ए रजवी के मंच पर मौजूद रहे ये उलमा
उर्से रजवी के मंच पर मौलाना अर्सलान रजा, मुफ्ती जईम रजा, हाजी गुलाम सुब्हानी, आसिम नूरी, सुल्तान रजा, शोएब रजा, सैय्यद सैफी मियां, कारी रजा-ए-रसूल, मौलाना इरफानुल हक कादरी, मुफ्ती इमरान हनफी, मॉरीशस से मुफ्ती नदीम अख्तर, मुफ्ती अख्तर हुसैन, मुफ्ती अय्यूब, कारी सखावत नूरी, मुफ्ती जीशान रजा, मौलाना सगीर अख्तर जोखनपुरी, खानकाह ए तहसीनिया के सज्जादानशीन मौलाना हस्सान रजा खान, मुस्तहसन रजा खान आदि रहे।
रजाकारों ने संभाली व्यवस्थाएं
उर्स ए रजवी में आने वाले लाखों जायरीन की सेवा में जो रजाकार दिन-रात डटे रहे, उनमें राशिद अली खान, मौलाना जाहिद रजा, मौलाना बशीर उल कादरी, शाहिद खान, हाजी जावेद खान, नासिर कुरैशी, अजमल नूरी, ताहिर अल्वी, परवेज नूरी, रईस रजा, मंजूर रजा, नफीस खान, आसिफ रजा, शान रजा, मुजाहिद रजा, सय्यद फैजान अली, इशरत नूरी, तारिक सईद, यूनुस गद्दी, जुहैब रजा आदि रहे।
