बाराबंकी: उपज का अच्छा मूल्य दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता, आलू की कम निकासी पर डीएम ने जताई चिंता
बाराबंकी, अमृत विचार। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक हुई। बैठक में जनपद में स्थित शीतगृहों से आलू की निकासी की स्थिति की समीक्षा की गई। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अन्ना सुदन, उप निदेशक उद्यान गीता त्रिवेदी, जिला उद्यान अधिकारी, मंडी सचिव, शीतगृह स्वामी व किसान यूनियन पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025 में जनपद के 77 निजी शीतगृहों में कुल 7,69,226 मीट्रिक टन आलू का भण्डारण हुआ था। जिले के 90 प्रतिशत से अधिक किसान आलू की खेती करते हैं और इसका बड़ा हिस्सा बिहार, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों को भेजा जाता है। पिछले वर्ष अगस्त माह में आलू की निकासी दर 33 प्रतिशत रही थी, जबकि इस वर्ष अगस्त 2025 में यह घटकर मात्र 25.40 प्रतिशत रह गई है।
इस गिरावट को लेकर जिलाधिकारी ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का अधिक मूल्य दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए मंडी सचिव और जिला उद्यान अधिकारी को निर्देशित किया गया कि किसानों को अधिक से अधिक बाजार उपलब्ध कराएं, वहीं शीतगृह स्वामियों से किसानों के हित में सहयोगात्मक रुख अपनाने को कहा गया।
बैठक में खाद की उपलब्धता को लेकर भी चर्चा हुई। किसानों ने बताया कि अब समितियों के माध्यम से खाद पहले की तुलना में अधिक सहजता से उपलब्ध हो रही है, जिससे उन्हें राहत मिली है। बैठक में सभी अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के बीच खुले संवाद के माध्यम से समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा की गई, जिससे आने वाले समय में किसानों को बेहतर सुविधा और मूल्य मिल सके।
