वर्षों से कुर्सी पर बैठे विभागाध्यक्ष, योग्य चिकित्सकों को मौका नहीं, अयोध्या मेडिकल कॉलेज में नियमों की अनदेखी

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Edited By Amrit Vichar
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अयोध्या, अमृत विचार। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज नियमों की अनदेखी के कारण चर्चा में है। शासन-प्रशासन के निर्धारित नियमों के अनुसार मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्षों का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है, जिसके बाद अन्य योग्य चिकित्सकों को इस पद पर नियुक्ति का अवसर मिलना चाहिए, लेकिन इस कॉलेज में यह नियम केवल कागजों तक सीमित रह गया है।

छह वर्ष बीत जाने के बावजूद कई विभागाध्यक्ष की कुर्सी पर जमे हुए हैं। इस स्थिति ने न केवल कॉलेज की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि योग्य चिकित्सकों के मनोबल को भी प्रभावित किया है, जो वर्षों से अवसर की प्रतीक्षा में हैं। मेडिकल कॉलेज में कुल 17 विभाग हैं। जिनमें मेडिसिन, सर्जरी, गायनाकोलॉजी, पेडियाट्रिक्स, नेत्र रोग, फिजियोलॉजी, एनाटॉमी व कम्युनिटी मेडिसिन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

इन विभागों के प्रमुखों की नियुक्ति और रोटेशन के लिए स्पष्ट नियम हैं। सूत्रों की मानें तो 2019 से एक भी विभागाध्यक्ष को नहीं हटाया गया है। दूसरी ओर कई योग्य और अनुभवी चिकित्सक जो विभागाध्यक्ष बनने की पात्रता रखते हैं, केवल ओपीडी में मरीजों का पर्चा देखने तक सीमित हैं। विभागाध्यक्षों के लंबे समय तक एक ही पद पर बने रहने से युवा चिकित्सकों में भी असंतोष बढ़ रहा है।

लगभग 20 प्रोफेसर्स है कॉलेज में

मेडिकल कॉलेज में लगभग 20 के करीब प्रोफेसर्स हैं। कुछ एसोसिएट हैं, जिन्हें अगले कुछ महीनों में ही प्रोफेसर्स का पद मिल जाएगा। वहीं कई असिस्टेंट प्रोफेसर्स भी प्रमोशन पाने वाले हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि कई विभागाध्यक्ष ऐसे भी हैं, जो कभी ओपीडी में ही नहीं जाते हैं।

हमारे यहां कई योग्य चिकित्सक हैं। उन्हें मौका अब मिलना चाहिए, लेकिन शासन का नियम संभवत: पांच वर्षों की सेवा के बाद रोटेशन का है। हालांकि वह डेडलाइन भी बीत ही चुकी है। पूर्व प्राचार्य ने इसको लेकर शासन को पत्र लिखा था। कोई जवाब नहीं आया। गवर्निंग बॉडी की मीटिंग भी नहीं हुई है। आगामी बैठक में यह मुद्दा उठाऊंगा। मैं बुधवार को ही इसे लेकर शासन को पत्र लिखूंगा, ताकि अन्य चिकित्सकों को भी मौका मिल सके... डॉ. सत्यजीत वर्मा, प्राचार्य।

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