हाईकोर्ट की फटकार : अवैध कार्य में लिप्त व्यक्ति की भी गिरफ्तारी कानून के दायरे में हो
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 65 वर्षीय महमूद बेग की कथित अवैध हिरासत पर दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए बरेली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट के पूर्व के आदेश के अनुपालन में एसएसपी अनुराग आर्य सोमवार को कोर्ट में स्वयं उपस्थित हुए और बेग को कोर्ट में प्रस्तुत किया। इस दौरान कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि खाकी वर्दी कानून से ऊपर नहीं, अवैध कार्य में लिप्त व्यक्ति की भी गिरफ्तारी विधि सम्मत तरीके से हो।
न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को बरेली के एसएसपी अनुराग आर्या महमूद बेग को लेकर उपस्थित हुए। शपथपत्र देकर बताया कि बेग अवैध हिरासत में नहीं हैं। उन्हें एक पीड़ित के बयान के आधार पर अवैध धर्मांतरण के आरोप में सात सितंबर को गिरफ्तार किया गया है। इसके बाद मजिस्ट्रेट के आदेश पर पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है। याची बेग की पत्नी परवीन अख्तर की ओर से पेश अधिवक्ता एहतेशाम अफसर खान ने दलील दी कि उन्हें 20 अगस्त की रात ही घर से उठा लिया गया था। सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए कहा गया कि रात 11:15 बजे तीन जीप में आए 11 लोग घर में घुसे और जब बेटे ने विरोध किया तो एक ने रिवॉल्वर उसके सीने पर तान दी।
अधिवक्ता का आरोप है कि विशेष ऑपरेशन ग्रुप ने बेग को अवैध हिरासत में रखा और यातनाएं दीं। अधिवक्ता ने एसएसपी के हलफनामे का जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए सुनवाई स्थगित कर दी। अब अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगली तारीख पर पुलिस अधिकारियों या महमूद बेग की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं होगी, जब तक कि कोर्ट से कोई नया आदेश न दिया जाए।
