कैसरबाग की अमीरुद्दौला लाइब्रेरी में 300 से अधिक पांडुलिपियां: टर्किस हिस्ट्री है सबसे पुरानी किताब
वीरेंद्र पांडेय/लखनऊ, अमृत विचार: राजधानी के कैसरबाग स्थित अमीरुद्दौला लाइब्रेरी पुस्तक प्रेमियों के लिए आज भी सबसे खास जगहों में एक है। ये प्रदेश की सबसे पुरानी लाइब्रेरी बताई जाती है। करीब 150 साल पुरानी इस लाइब्रेरी में सैकड़ों वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां मौजूद हैं। जिनमें 300 का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। लाइब्रेरी में सबसे पुरानी किताब टर्किस हिस्ट्री है।
हिन्दी, संस्कृत, पाली, तिब्बती, बर्मीज, अरबी, और फारसी भाषाओं में उपलब्ध इन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण का काम स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत किया गया है। इनमें ताड़ के पत्तों, कागज और ताम्रपत्र (तांबे की प्लेटों) पर लिखी पांडुलियां शामिल है।
पुस्तकालयाध्यक्ष सुप्रिया शर्मा ने बताया कि अमीरुद्दौला लाइब्रेरी में रखी किताबों, पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण का कार्य साल 2020 में शुरू कर दिया गया था, जो अब भी जारी है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में 75 हजार किताबें और 300 पांडुलिपियों के अलावा 27 हजार ई-जर्नल और 50 हजार ई-बुक्स भी शामिल हैं।
लखनऊ डिजिटल लाइब्रेरी पर सर्च करो खुल जाएगा पेज
गूगल पर लखनऊ डिजिटल लाइब्रेरी सर्च करने पर इसका पेज खुल जाता है। जिस पर जाकर आसानी से इन पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इस लाइब्रेरी में सबसे पुरानी किताब टर्किस हिस्ट्री है, जो साल 1687 की बतायी जा रही है। इसे लोग खूब सर्च करते हैं।
जानें...क्या होती है पांडुलिपि
पांडुलिपि हाथ से लिखा हुआ एक दस्तावेज होता है, जो प्राचीन काल में अपने हाथों से ताड़ के पत्तों, कपड़ों, तांबे की प्लेटों और बाद में कागज पर इसकी लिखाई जारी रही।
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