किसी अजूबे जैसी अमूल्य धरोहर है सलखन जीवाश्म पार्क
धरती का रहस्य और जीवन की उत्पति के निशान यहां
- 450 – करोड़ वर्ष मानी जाती है धरती की उम्र
- 400 – करोड़ साल पहले हुई जीवन की शुरुआत
- 200 – करोड़ साल शुरू में रहा प्रोकैरेयोट का वर्चस्व
- 150 – करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्म सलखज, सोनभद्र में मिले
धरती की उम्र का अनुमान 450 करोड़ साल के आसपास लगाया गया है। लेकिन इन 450 करोड़ सालों में जीवन की शुरुआत कब हुई, जीवाश्म इसी तरफ इशारा करते हैं। वैज्ञानिक मान्यता जीवन की शुरुआत धरती पर लगभग 400 करोड़ साल पहले होने की है, लेकिन कहां हुई, इसे लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं। इनमें सर्वाधिक प्रबल धारणा कहती है कि जीवन की शुरुआत समुद्र की सतह पर हुई थी। पहले जीव जो धरती पर आए, उन्हें प्रोकैरेयोट कहा जाता है। इन जीवों में न्यूक्लियस यानी केंद्रक नहीं होता है, और हमारी कोशिकाओं के मुकाबले बहुत सरल होते हैं। बैक्टीरिया की किस्म प्रोकैरेयोट ही होती है।
इन्हीं बैक्टीरिया को मारने के लिए हमें एंटीबायोटिक दवाएं खानी पड़ती हैं। धरती पर जब जीवन का अविष्कार हुआ, तो दो तरह के प्रोकैरेयोट सामने आए। इनमें एक का नाम बैक्टीरिया और दूसरे का आर्किया है। धरती पर इनका वर्चस्व लगभग 200 करोड़ साल तक चला। इनमें साइनोबैक्टीरिया को लगभग 350 करोड़ वर्ष पुराना माना जाता है। इन जीवाश्म को पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की आर्कियन चट्टानों में पाया गया था। सोनभद्र जिले के सलखन गांव के पास भी साइनोबैक्टीरिया पाए जाते हैं। यह दुर्लभ जीवाश्म नीले-हरे शैवाल द्वारा निर्मित हैं। इनकी उम्र 150 करोड़ साल के आसपास है।
सलखन में है दुनिया का सबसे बड़ा जीवाश्म पार्क
फॉसिल्स या जीवाश्म पार्क उन्हें कहते हैं, जहां खोदाई में मिले हजारों-लाखों साल पुराने अवशेषों को सहेज कर रखा जाता है। उत्तर प्रदेश में सलखन एक ऐसा ही महत्वपूर्ण जीवाश्म पार्क है। 25 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला यह पार्क कैमुर वन्य जीव अभयारण्य के भीतर स्थित है। सोनभद्र जिले में यह जगह रॉबर्ट्सगंज से 17 किमी की दूरी पर है। कुदरत का नायाब तोहफा और दुनिया की अनमोल धरोहर सलखन फासिल्स पार्क पृथ्वी पर जीवन के शुरुआत की कहानी बयां करता है। यहां स्ट्रोमैटोलाइट्स को संरक्षित किया गया है, जो प्राचीन साइनोबैक्टीरिया (नीली-हरित शैवाल) द्वारा निर्मित दुर्लभ संरचनाएं हैं। सलखन जीवाश्म पार्क अमेरिका के येलो स्टोन नेशनल पार्क के फासिल्स से भी काफी पुराना है। सलखन में मिले 150 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्म, इसे दुनिया का सबसे बड़ा फासिल्स पार्क बनाते हैं। यहां पाए गए करोड़ों वर्ष पुराने शैवाल और स्ट्रॉमैटोलाइट्स के जीवाश्म धरती पर जीवन के सबसे पुराने साक्ष्य हैं।
गोल छल्ले जैसी आकृतियों को ग्रामीण बताते थे पत्थर के फूल
सलखन जीवाश्म पार्क में लाम स्टोन स्तम्भ और दुर्गम दृश्य हैं, जिनकी ऊपरी सतह पर अंकित गोल छल्ले जैसी आकृतियों वाली लगभग एक मीटर ऊंची रचनाएं 150 करोड़ साल से ज्यादा पुराने जीवन के प्रमाण हैं। सिएनोबैक्टीरिया की बनाई इन संरचनाओं को स्थानीय लोग दशकों से पत्थर के फूल कहते हैं। दो दशक पहले 50 देशों के भू वैज्ञनिकों ने सलखन में भ्रमण करने के बाद इसे पूरी दुनिया का सबसे पुराना बहुमूल्य फासिल्स पार्क बताया था।
सोनभद्र में 150 करोड़ वर्ष पहले समुद्र की लहरें मारती थीं हिलोरें
धरती पर ऐसे तमाम रहस्य छिपे हैं, जिन्हें जानने की कोशिश में दुनिया भर के वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं। मान्यता है कि लगभग 350 करोड़ वर्ष पूर्व पैदा हुए सायनोबैक्टीरिया संभवतः ऑक्सीजनिक प्रकाश संश्लेषण करने वाले प्रथम जीव थे, जिनके कारण लगभग 250 करोड़ वर्ष पूर्व ऑक्सीकरण की घटना घटित हुई। इसी ने पृथ्वी के वायुमंडल को ऑक्सीजन से समृद्ध किया। इसके बाद ही धरती पर जीवन संभव हो सका। प्रकाश संश्लेषण करने वाले ये सूक्ष्मजीव करीब 160 करोड़ वर्ष पुराने मेसोप्रोटेरोजोइक युग के हैं, इसी कारण इनके जीवाश्म 140 से 150 करोड़ वर्ष पुराने माने जाते हैं। सलखन में मिले जीवन के सृजन की शुरुआत के साक्षी जीवाश्मों ने इस तथ्य पर मुहर लगाई है कि 150 करोड़ वर्ष पूर्व यहां समुद्र की लहरें हिलोरें मारा करती थीं।
दुनिया में कहीं और नहीं, इतने खूबसूरत और स्पष्ट जीवाश्म
सलखन में पाए गए जीवाश्म धरती के प्रारंभिक जैवमंडल और महासागरीय पारिस्थितिकी तंत्र के विकास से संबंधित महत्वपूर्ण खोज प्रदान करते हैं। भू वैज्ञानिकों को यहां के जीवाश्म ने पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के बारे में महत्वपूर्ण सबूत प्रदान किए हैं। 1933 में इनकी खोज जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया ने की थी। कनाडा के प्रख्यात भूवैज्ञानिक एचजे हाफमैन ने सलखन आने के बाद कहा था कि इससे खूबसूरत और स्पष्ट जीवाश्म दुनिया में कहीं और नहीं हैं। ऐसे में यह पार्क वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यटन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है... मनोज त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार।
