कानपुर: चार घंटे का आदेश, 20 घंटे में हो सका पोस्टमार्टम, बेहाल हुए परिजन, जानें वजह

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Edited By Amrit Vichar
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नहीं आई ड्यूटी डॉक्टर, कल्याणपुर से दूसरी डॉक्टर को पोस्टमार्टम पहुंचने में लगे चार घंटे

कानपुर, अमृत विचार। चार घंटे में शव का पोस्टमार्टम कर डेडबॉडी परिजनों को सुपुर्द करने आदेश है, लेकिन रोते-बिलखते घरवालों को 20-20 घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। दहेज हत्या के आरोप में शुक्रवार को विवाहिता का पोस्टमार्टम दूसरे दिन हुआ। वह भी तेजी तब आई जब पीड़ित परिजनों ने सीएमओ से शिकायत की। दूसरी डॉक्टर ने कल्याणपुर सीएचसी से तत्काल पोस्टमार्टम पहुंचने को कहा, लेकिन उन्हें भी आने में चार घंटे लग गए। 

पोस्टमार्टम हाउस पर शुक्रवार को तीन डॉक्टरों दो पुरुष व एक महिला की ड्यूटी थी। महिला डॉक्टर के न आने से कानपुर देहात के शंकर दयाल नगर की 24 वर्षीय नाजरीन पोस्टमार्टम नहीं शुरू हो सका। इस पर परिजनों ने नाराजगी जताई। नाजरीन के मामा मो. रियाज ने बताया कि गुरुवार सुबह छह बजे से से शव पोस्टमार्टम हाउस में रखा है।

पहले पुलिस ने पंचनामा भरने में सुबह से शाम कर दी। फिर पोस्टमार्टम न हो पाने से रातभर रुकना पड़ा। अगले दिन शुक्रवार को भी दोपहर 11.30 बजे तक महिला डॉक्टर नहीं आई हैं। इस पर पोस्टमार्टम इंचार्ज डॉ. नवनीत चौधरी ने ड्यूटी चिकित्सक डॉ. निदा नाज गनी से संपर्क किया। उनहोंने कहा कि वह अवकाश पर हैं। उनकी ड्यूटी कैसे लग गई। इस पर इंचार्ज ने दो अन्य महिला चिकित्सकों से संपर्क किया तो उन्होंने मजबूरी बताई।

इसी बीच परिजनों ने सीएमओ से मोबाइल पर बात कर शिकायत की तो उन्होंने तत्काल डॉक्टर भेजने की बात कही। कल्याणपुर सीएचसी की डॉ. वर्षा सिंह की ड्यूटी लगाई गई और उन्होंने तत्काल पहुंचने की बात कही। लेकिन उन्हें भी कल्याणपुर से पोस्टमार्टम हाउस आने में दोपहर साढ़े ग्यारह बजे से पौने तीन बज गया। तब जाकर नाजरीन का पोस्टमार्टम हो सका। दूसरे दिन परिजन शव लेकर कानपुर देहात गए। पोस्टमार्टम इंचार्ज के अनुसार परिजनों की शिकातय पर पता किया तब डॉक्टर के अवकाश की जानकारी हुई। इस पर तुरंत व्यवस्था कराई गई। 
  
किसी एक लापरवाही से पोस्टमार्टम में होती देरी

कभी समय से पंचनामा नहीं भरा जा सका तो कभी समय से चिकित्सक नहीं आए। इसी कारण उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आदेश का पालन नहीं हो पा रहा है। लेकिन शुक्रवार को नाजरीन के पोस्टमार्टम में तीसरी ही लापरवाही सामने आई। जब बिल्हौर सीएचसी की डॉ. निदा नाज गनी अवकाश पर थी, तो उनकी ड्यूटी कैसे लग गई। क्योंकि यह तो डॉक्टर का भी कहना था कि उन्होंने पहले से अवकाश स्वीकृत कराया था। फिलहाल दूसरे जिलों से आने वाले दुखी परिजन इसी तरह की लापरवाही से रोज परेशान होते हैं।

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