पटाखा मंडी में नियम कानून ताक पर रखकर कारोबार, फुटकर दुकानों पर खुलेआम मानकों का उल्लंघन

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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नीरज मिश्र/लखनऊ, अमृत विचार: कम वजन के पटाखे बेचने का छोटा लाइसेंस लिया और ज्यादा भार का व्यापार करना शुरू कर दिया। कारोबारियों ने पटाखा जमा करने और दुकान चलाने के मानक तक ताक पर रख दिए हैं। न दुकानों के आकार की परवाह है और न ही मानकों के अनुसार वजन की। बात काकोरी अमेठिया सलेमपुर की थोक पटाखा मंडी की है।

जहां कारोबारियों ने मनमाने तरीके से पटाखों का व्यापार शुरू कर दिया है। वह भी तब जब मात्र बीस दिन पहले ही राजधानी के बेहटा में अवैध पटाखे के कारोबार में हुए विस्फोट से चार लोगों ने जान गंवाई थी। इसके बाद भी कारोबारियों और जिम्मेदारों ने सबक नहीं लिया है।

लखनऊ का सबसे बड़ा थोक पटाखा बाजार अमेठिया सलेमपुर में है। इसमें लगभग 59 लाइसेंसी है। कुछ दुकानदारों को छोड़कर सभी दुकानदार अपनी सीमा को पार करते हुए बड़े-बड़े शोरूम बना रखे हैं। कमिश्नर के लाइसेंस पर जिसकी पटाखा जमा करने का वजन 450 से 600 किग्रा. होती है उस पर ही यह कारोबारी बड़ा काम करते हैं। पटाखा कारोबार लाइसेंस के लिए अलग-अलग वजन, स्टॉक जमा करने और दुकानों के लिए साइज तक निर्धारित हैं। लेकिन यहां इनका अनुपालन नहीं होता है।

संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था बब्लू कुमार ने बताया कि गुडंबा घटना के बाद फायर वर्क्स डीलर एसोसिएशन के साथ बैठक कर दिशा निर्देश दिए गए हैं। राजधानी के छोटे-बड़े 101 पटाखा व्यवसायी लाइसेंस धारकों को यूपी कॉप एप पर चरित्र सत्यापन कराने को कहा गया है।

इनमें पश्चिम जोन में 59, दक्षिणी जोन में 24, उत्तरी जोन में 15 व पूर्वी जोन में 3 लाइसेंस धारक हैं। दुकानों व भंडारण गृह अलग होंगे। इसके बाहर लाइसेंस की प्रतिलिपि भी चस्पा करने के निर्देश दिए गए थे। संबंधित एसीपी व सीएफओ द्वारा लगातार जांच की जा रही है। अगर लाइसेंस से अधिक का माल मिलने की शिकायत मिलेगी तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

तीन तरह के पटाखा लाइसेंस होते हैं जारी

पहली तरह का लाइसेंस- कमिश्नरेट स्तर से जारी होता है। इसमें 450 से 600 किग्रा. तक के वजन का पटाखा रखने की अनुमति होती है। गोदाम भी पटाखा बेचे जाने वाली दुकानों से दूर होना चाहिए।

दूसरी तरह का लाइसेंस आगरा के चीफ कंट्रोलर की ओर से जारी होता है। इसमें कारोबारी को 1,500 किग्रा. पटाखा बेचने की अनुमति होती है। साथ ही करीब 5,000 किग्रा. पटाखा जमा करने के लिए दुकान से दूर तमाम सख्त नियमों के साथ गोदाम में सुरक्षित रखे जाने की सहमति होती है। सबसे जरूरी बात यह है कि इस वजन के व्यापार के लिए दुकानों का साइज 180 से 200 स्क्वायर फीट होना चाहिए। बड़ी दुकान कतई नहीं होनी चाहिए।

तीसरे प्रकार का लाइसेंस नागपुर से जारी होता है। इन्हें व्यापारिक आम भाषा में मैंगजीन के रूप में जाना जाता है। इसके वजन की कैपासिटी 50,000 किग्रा. से शुरू होकर दो लाख किग्रा. तक होती है। इसके लिए तमाम सख्त गाइड लाइनें हैं।

साइज से बड़ी दुकान और गोदाम साथ-साथ

कम वजन रखने वाला यानी 450 से 600 किग्रा. तक वजन का लाइसेंस ले लिया। मानक ताक पर रखकर साइज से दो से ढाई गुनी बड़ी दुकान बनवाई और इस छोटे लाइसेंस की आड़ में करीब तीन गुना माल जमा कर लिया। नियम इतने सख्त हैं कि दुकान के बराबर या इसके आसपास गोदाम नहीं होना चाहिए लेकिन इस मंडी में इस नियम का भी खुलेआम उल्लंघन होता मिलेगा। ज्यादातर दुकानों के बगल में ही गोदाम भी मिलेंगे। जहां मानक से ज्यादा माल डंप किया जाता है।

वैसे तो पटाखा की दुकानों में प्लास्टिक प्रतिबंधित होती है लेकिन अमेठिया की थोक मंडी में प्लास्टिक की बाड़ तक नजर आएगी। दिलचस्प यह है कि जब जिम्मेदार पहुंचते हैं तो पटाखा व्यापारी लाइसेंस दिखा कर सब कुछ सही होने का हवाला देते हैं। वजह यह रहती है कि पुलिस के जिम्मेदार न दुकानों के साइज की जांच करते हैं और न ही आसपास बने गोदाम के माल के वजन की चेकिंग।


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