जीएसटी का उद्देश्य व्यापार को सरल बनाना है,न कि व्यापारियों का उत्पीड़न: हाईकोर्ट
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक दवा कंपनी के खिलाफ पारित कर आदेश को रद्द करते हुए कहा कि जीएसटी का उद्देश्य व्यापार को सरल बनाना है, न कि धारा 74 की आड़ में डीलरों को परेशान करना। दवाओं के थोक व्यापारी मेसर्स सेफकॉन लाइफ साइंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की एकलपीठ ने कर अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि व्यापार को आसान बनाने के लिए लाई गई जीएसटी व्यवस्था का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।
याचिका में आगरा के वाणिज्य कर उपायुक्त और राज्य कर अपर आयुक्त के आदेशों को चुनौती दी गई थी। मामला 2021 में महाराष्ट्र की यूनिमैक्स फार्मा केम से की गई खरीद पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़ा था। सेफकॉन ने सभी वैध दस्तावेज और भुगतान प्रमाण प्रस्तुत किए थे, लेकिन विभाग ने आपूर्तिकर्ता का पंजीकरण रद्द होने और उसके आपूर्तिकर्ताओं द्वारा कर न चुकाने के आधार पर आईटीसी को गलत ठहराया।
कोर्ट ने पाया कि अधिकारियों ने बिना तथ्यों की जांच किए केवल खुफिया रिपोर्ट पर भरोसा किया और धोखाधड़ी या जानबूझकर गलतबयानी का कोई साक्ष्य नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों और 13 दिसम्बर 2023 के सीबीआईसी परिपत्र का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि धारा 74 तभी लागू होगी जब कर चोरी का इरादा साबित हो।
