Ramleela: जंगल में छलावा बना मायावी मृग, रावण ने साधु वेश में किया माता सीता का हरण

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
On

रेलवे रामलीला दशहरा कमेटी, आलमबाग में मंचित हुआ सीता हरण प्रसंग

लखनऊ, अमृत विचारः रेलवे रामलीला दशहरा कमेटी व भरत मिलाप शोभा यात्रा समिति आलमबाग की ओर से आयोजित रामलीला महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार को रावण-मारीच संवाद, सीता हरण और रावण-जटायु युद्ध जैसे भावनात्मक और रोमांचक प्रसंगों का जीवंत मंचन किया गया। दर्शकों ने मंत्रमुग्ध होकर श्रीराम कथा के इस महत्वपूर्ण चरण को देखा, जिसमें प्रेम, विश्वास, छल और बलिदान की झलक दिखाई दी।

MUSKAN DIXIT (14)

छल से रचा गया सीता हरण का षड्यंत्र

रामलीला की शुरुआत माता सीता और प्रभु श्रीराम के बीच संवाद से हुआ। जंगल में 13 वर्ष व्यतीत होने के बाद माता सीता कहती हैं,जंगल में हमें 13 वर्ष बीत गए, अब एक वर्ष बाद तो हम अयोध्या चलेंगे ना, प्रभु श्रीराम सहमति देते हैं। तभी सीता की दृष्टि एक सुंदर मृग (मारीच रूपी मृग) पर पड़ती है। उसकी मोहक छवि से मोहित होकर वह श्रीराम से आग्रह करती हैं कि मृग को पकड़ कर लाएं जीवित न सही, उसकी खाल ही ले आएं। श्रीराम मृग के पीछे वन की ओर चले जाते हैं। काफी देर बाद वन से श्रीराम की करुणा भरी आवाज सुनाई देती है। यह सुनकर माता सीता व्याकुल हो उठती हैं और लक्ष्मण को तुरंत श्रीराम की सहायता के लिए भेजने का आग्रह करती हैं। लक्ष्मण इस षड्यंत्र को समझते हैं और माता सीता को रोकते हुए कहते हैं। घड़ी आई है खोटी, वो भी दो रास्तों से आई है, न जाने में भलाई है, ना रहने में भलाई है,’ रहा तो ढिठाई है, गया तो भी बेहयाई है’।

MUSKAN DIXIT (15)

लक्ष्मण रेखा का खींचना और रावण का आगमन

आखिरकार माता सीता के दबाव में आकर लक्ष्मण वन को प्रस्थान करते हैं, लेकिन जाने से पहले वे कुटिया के बाहर एक लक्ष्मण रेखा खींचते हैं और माता सीता से विनती करते हैं कि वे उस रेखा को पार न करें। ये रेख उल्लंघन कर, जो कुटिया के भीतर जाएगा, है आन उसे लक्ष्मण की, तत्काल भस्म हो जाएगा। लक्ष्मण के जाते ही रावण साधु का वेश धारण कर कुटिया के बाहर आता है और भिक्षा की याचना करता है। माता सीता के मना करने पर भी वह हट नहीं छोड़ता और जाने की धमकी देता है। भावुक हो माता सीता जैसे ही लक्ष्मण रेखा पार कर उसे भिक्षा देती हैं, रावण अपने राक्षसी रूप में आकर उन्हें बलपूर्वक अपहरण कर पुष्पक विमान में लंका की ओर ले जाता है।

MUSKAN DIXIT (16)

जटायु का वीरतापूर्ण प्रतिरोध

लंका की ओर जाते समय मार्ग में वीर पक्षीराज जटायु रावण को रोकते हैं और माता सीता को मुक्त कराने के लिए उससे युद्ध करते हैं। दोनों के बीच भीषण युद्ध होता है, लेकिन रावण छल से जटायु को गंभीर रूप से घायल कर देता है और माता सीता को लेकर लंका चला जाता है।

यह भी पढ़ेंः Bihar Assembly Elections: सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम, 350-400 केंद्रीय बल कंपनियों की तैनाती की तैयारी

संबंधित समाचार