शादी डॉट कॉम के सीईओ अनुपम मित्तल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को हाईकोर्ट ने किया रद्द
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को शादी डॉट कॉम के सीईओ अनुपम मित्तल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया। यह एफआईआर एक ग्राहक द्वारा धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग के आरोप में दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता, जो पेशे से अधिवक्ता हैं, उनका आरोप था कि उन्होंने शादी डॉट कॉम पर विवाह हेतु प्रोफ़ाइल बनवाने के लिए सदस्यता ली और भुगतान भी किया।
मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और तस्वीरें उपलब्ध कराने के बाद उसकी प्रोफ़ाइल वेबसाइट पर तैयार की गई। प्राथमिकी के अनुसार प्लेटफॉर्म पर कई सत्यापित प्रोफ़ाइल धारक अश्लील सामग्री के प्रचार व व्यभिचारी गतिविधियों में संलिप्त पाए गए। शिकायतकर्ता ने विशेष रूप से मोनिका गुप्ता पर आरोप लगाया कि उसने उनके अश्लील वीडियो बनाए और 5100 रुपए की वसूली के लिए ब्लैकमेल किया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने पहले शादी डॉट कॉम के कस्टमर केयर से संपर्क किया और उसके बाद सीईओ अनुपम मित्तल से व्यक्तिगत रूप से शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर अंततः प्राथमिकी दर्ज कराई गई। आरोप लगाया गया कि सीईओ ने उपयुक्त जीवनसाथी उपलब्ध कराने के नाम पर वास्तव में उसकी भावनाओं से खिलवाड़ किया और उसके विश्वास को तोड़ा।
इस कारण पुलिस स्टेशन न्यू आगरा, आगरा में आईपीसी की धारा 420, 384, 507, 120-बी और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई थी। एफआईआर को चुनौती देते हुए अनुपम मित्तल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की खंडपीठ ने निष्कर्ष निकाला कि याची पर व्यक्तिगत रूप से अपराध करने का आरोप नहीं लगाया जा सकता है। कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता मंच पर बने रहे, जबकि वे चाहें तो उससे हट सकते थे।
कोर्ट ने आईटी अधिनियम की धारा 79 और गूगल इंडिया प्रा. लि. बनाम विसाका इंडस्ट्रीज मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि याची एक मध्यस्थ/सुविधाकर्ता है, जो तीसरे पक्ष की गतिविधियों के लिए जिम्मेदार नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि जिन प्रोफाइलों के खिलाफ शिकायत थी, उनमें से एक को हटा दिया गया है और जब-जब शिकायतें मिलीं, कार्रवाई की गई। इस आधार पर कोर्ट ने माना कि कंपनी और उसके सीईओ के विरुद्ध जबरन वसूली या धोखाधड़ी का कोई मामला नहीं बनता। अतः अनुपम मित्तल के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द कर दी गई।
