इन कारणों से रिजर्व बैंक ने नहीं घटाई रेपो दर, UPI ट्रांसक्शन करने वालों पर नहीं लगेगा कोई अतिरिक्त शुल्क

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अमेरिकी आयात शुल्क और वैश्विक व्यापार को लेकर जारी अनिश्चितताओं के मद्देनजर रेपो दर तथा अन्य दरों में बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक की बाद बुधवार को रेपो दरों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.50 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है। अन्य दरों को भी यथावत रखा गया है। 

इससे पहले, अगस्त में भी आरबीआई ने रेपो तथा अन्य नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। फरवरी, अप्रैल और जून में तीन बार में रेपो दर में कुल एक प्रतिशत की कटौती की गयी थी। नीतिगत दरों की घोषणा के बात संवाददाता सम्मेलन में श्री मल्होत्रा ने बताया कि खुदरा मुद्रास्फीति में नरमी से दरों में कटौती के लिए संभावना बनी है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में 22 सितंबर से जारी कमी से आने वाले समय में मुद्रास्फीति कम बनी रहेगी। 

इसके बावजूद, अमेरिका द्वारा लगाये गये 50 प्रतिशत आयात शुल्क और वैश्विक कारकों की अनिश्चितता के कारण रेपो दरों में बदलाव नहीं किया गया है। रिजर्व बैंक कोई भी कदम उठाने से पहले और आंकड़ों का इंतजार करेगा। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन अमेरिकी आयात शुल्क से निर्यात प्रभावित होगा, विशेष रूप अमेरिका को होने वाले रत्न-आभूषण, श्रृंप, परिधानों, ब्रांडेड दवाइयों, जूते-चप्पल का निर्यात अधिक प्रभावित होगा। 

रिजर्व बैंक ने पहली तिमाही के मजबूत आंकड़ों को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है। दूसरी तिमाही का विकास अनुमान सात प्रतिशत, तीसरी तिमाही का 6.4 प्रतिशत और चौथी तिमाही का 6.2 प्रतिशत रखा गया है। वहीं, अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जीएसटी दरों में लागू कटौती के बाद खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान चालू वित्त वर्ष के लिए 3.1 प्रतिशत से घटाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया गया है। 

आरबीआई ने दूसरी और तीसरी तिमाही में मुद्रास्फीति 1.8 प्रतिशत और चौथी तिमाही में चार प्रतिशत रहने का अनुमान जारी किया है। श्री मल्होत्रा ने कहा कि रेपो दर को लेकर एमपीसी के दो सदस्यों ने रुख को नरम बनाने के पक्ष में राय रखी थी, लेकिन अन्य सभी सदस्य इसे निरपेक्ष बनाये रखने के पक्ष में थे। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक का फोकस वित्तीय और मूल्य स्थिरता बनाये रखने पर है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने बैंकिग तंत्र में ऋण उठाव को बढ़ावा देने, भारतीय मुद्रा में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रोत्साहित करने और बिजनेस को आसान बनाने के लिए भी कई कदमों की घोषणा की।

UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं: मल्होत्रा 

एक अक्टूबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने बुधवार को कहा कि यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। गवर्नर ने साथ ही बताया कि केंद्रीय बैंक एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जिसके तहत वित्तीय संस्थानों को मासिक किस्त भुगतान में चूक की स्थिति में ऋण लेकर खरीदे गए मोबाइल फोन को डिजिटन तरीके से ‘लॉक’ करने की अनुमति मिल पाएगी। यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का प्रस्ताव होने के सवाल पर मल्होत्रा ​​ने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। 

UPI लेनदेन में वृद्धि 

उन्होंने मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘ क्या यूपीआई पर शुल्क लगेगा? हमारे समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।’’ ऋण पर खरीदे गए फोन को डिजिटल तरीके से ‘लॉक’ करने के बारे में गवर्नर ने कहा कि मामला विचाराधीन है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एम. राजेश्वर राव ने कहा कि फोन को डिजिटल तरीके से ‘लॉक’ करने के फायदे व नुकसान दोनों पर गौर किया जा रहा है। राव ने कहा, ‘‘ जैसा कि गवर्नर ने बताया कि डिजिटल तरीके से फोन को ‘लॉक’ करने का मामला विचाराधीन है। 

ग्राहकों के अधिकारों व जरूरतों, निजी सूचना की गोपनीयता एवं कर्ज देने वालों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने के मामले में दोनों पक्षों के फायदे व नुकसान हैं। इसलिए हम इस मुद्दे पर गौर कर रहे हैं और बाद में इस पर कोई निर्णय लेंगे।’’ नीतिगत दरों में कटौती पर गवर्नर ने कहा कि मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जिससे मौद्रिक नीति में ढील की गुंजाइश बनी है। 

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में गिरावट पर उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक किसी स्तर को लक्षित नहीं करता, बल्कि केवल अनावश्यक अस्थिरता को रोकने का प्रयास करता है। मल्होत्रा ​​ने भरोसा जताया कि मूल्य स्थिरता के साथ उच्च सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर जारी रहेगी तथा निजी पूंजीगत व्यय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने 2025-26 की पहली छमाही में अच्छी आर्थिक गतिविधियों के दम पर चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के वृद्धि अनुमान को 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है।

रुपये के लिए RBI ने तय नहीं किया है कोई दायरा: मल्होत्रा 

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रुपये में पिछले कुछ समय से जारी गिरावट के बारे में बुधवार को कहा कि केंद्रीय बैंक ने रुपये के लिए कोई दायरा तय नहीं कर रखा है, लेकिन उचित समय पर जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करेगा। श्री मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद जारी बयान में कहा था कि आरबीआई रुपये की स्थिति पर नजर रखे हुये है और उचित समय पर जरूरत के अनुरूप कदम उठायेगा। 

संवाददाता सम्मेलन में एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने रुपये के लिए कोई स्तर या दायरा तय नहीं किया है। उन्होंने कहा, " हालांकि हम किसी अनुचित उतार-चढ़ाव की स्थिति में उसके लिए उपाय करेंगे।" उल्लेखनीय है कि रुपया मंगलवार को ऐतिहासिक निचले स्तर 88.8075 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। दो महीने पहले भारतीय मुद्रा 86 से 87 रुपये प्रति डॉलर के बीच थी। 

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