दफ्न हुआ शैतान : 15 साल पहले नाबालिग संग हुआ था फरार, तबसे गांव की शक्ल नहीं देखी, लड़की का भी नहीं मिला सुराग

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। मुठभेड़ में मारे गए शैतान उर्फ इफ्तेकार के परिवार वालों को सात अलग-अलग पतों पर तलाश रही पुलिस ने उसकी असली शिनाख्त ढूंढ ली। पुलिस के मुताबिक उसका असली नाम फिरोज था। मूल रूप से संभल का रहने वाला फिरोज 15 साल पहले गांव की एक नाबालिग लड़की लेकर भागा था। उसके बाद से परिवार को भी उसका पता ठिकाना मालूम नहीं था। यहां तक कि फिरोज उर्फ शैतान दो साल पहले अपने लड़की की शादी तक में शामिल नहीं हुआ।

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रविवार सुबह तड़के पांच बजे मुठभेड़ में मारे गए एक लाख के ईनामी शैतान उर्फ इफ्तेकार यानी फिरोज को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उसकी पत्नी शाहिदा के साथ आए गांव के प्रधान की मौजूदगी में अवाम-ए-खिदमात कमेटी ने कैंट के एक कब्रिस्तान में उसे दफ्न किया। इफ्तेकार की पत्नी शाहिदा ने जो राज खोले वो हैरान करने वाले हैं। शाहिदा के मुताबिक फिरोज पुत्र अशाक हुसैन असल में संभल के थाना हजरतगढ़ी ग्राम मुकर्रमपुर का रहने वाला था। फिरोज यानी शैतान से शाहिदा की चार औलादे हैं। 

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इंदौर में काम करते हैं दोनों बेटे
बड़ी लड़की अजमी जिसकी शादी दो साल पहले मुरादाबाद कुंदरकी थाना क्षेत्र के गांव हरियाणा के रहने वाले हसीन से हुई थी। बड़ा लडका फैजान (18) और दूसरा लड़का अरबाज (17) दोनों इंदौर में रहकर एक कपड़े के कारखाने मे काम करते हैं। चौथी संतान नजमी 16 साल की है। गांव में शाहिदा सरकारी योजना से बने मकान में अपनी बेटी नजमी के साथ रहती है। इसके अलावा दूसरा कोई परिवार में नहीं।

पिता ने की थीं दो शादियां, दूसरी से था शैतान
शाहिदा ने पुलिस को बताया कि इतने पिता अशाक हुसैन ने दो शादियां की थीं। वह अपने पिता की दूसरी पत्नी की संतान था। मां की भी दो शादियां हुईं थीं। फिरोज अपने मां के पहले पति की संतान था। मां की 16 साल पहले मौत हो चुकी है। जबकि पिता की मौत चार साल पहले हो चुकी थी। वह अपने पिता के मरने पर भी घर नहीं आया था।

15 साल पहले लेकर भागा था नाबालिग लड़की
शाहिदा से शादी के बाद फिरोज को चार संताने हुईं। मगर अपने ही गांव की एक नाबालिग पर दिल आ गया। करीब 15 साल पहले उस नाबालिग लड़की को लेकर फरार हो गया। तबसे लेकर अब तक गांव कभी नहीं लौटा। जिस नाबालिग को लेकर वह भागा था उसके परिवार को भी अपनी बेटी का सुराग आज तक नहीं लगा।

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