शहरी पुनर्विकास नीति में आधुनिकता, परंपरा और मानवता तीनों का संतुलित समन्वय होगा : मुख्यमंत्री योगी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि शहरों के तेजी से बदलते विकास स्वरूप के मद्देनजर एक व्यापक ‘शहरी पुनर्विकास नीति’ की आवश्यकता है और इस नीति में आधुनिकता, परंपरा और मानवता तीनों का संतुलित समन्वय होगा।
मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह नीति केवल भवनों के पुनर्निर्माण तक सीमित न रहकर शहरों के समग्र पुनरुद्धार का मार्ग प्रशस्त करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे नगर केवल इमारतों का समूह नहीं बल्कि जीवंत सामाजिक संरचनाएं हैं और इनके पुनरुद्धार के लिए ऐसी नीति आवश्यक है, जो आधुनिकता, परंपरा और मानवता तीनों का संतुलित समन्वय करे।
बयान में बताया गया कि मुख्यमंत्री ने मंगलवार को आवास विभाग की बैठक में कहा कि नई नीति का उद्देश्य पुराने, जर्जर और अनुपयोगी क्षेत्रों को आधुनिक शहरी बुनियादी ढांचे, पर्याप्त सार्वजनिक सुविधाओं और पर्यावरणीय संतुलन के साथ विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि नीति में ऐसे प्रावधान किए जाएं, जिनसे निवास योग्य, सुरक्षित, स्वच्छ और सुव्यवस्थित नगरों का निर्माण सुनिश्चित हो। योगी ने निर्देश दिए कि नीति में भूमि पुनर्गठन, निजी निवेश को प्रोत्साहन, पारदर्शी पुनर्वास व्यवस्था और प्रभावित परिवारों की आजीविका की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति में राज्य स्तरीय पुनर्विकास प्राधिकरण, परियोजनाओं की ‘सिंगल विंडो अप्रूवल’ प्रणाली और पीपीपी मॉडल को प्राथमिकता दी जाए। योगी ने कहा कि नगरों की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए।
उन्होंने कहा कि पुराने बाजारों, सरकारी आवास परिसरों, औद्योगिक क्षेत्रों और अनधिकृत बस्तियों के लिए क्षेत्रवार अलग रणनीति तैयार की जाए तथा नीति में सेवानिवृत्त सरकारी आवासों, पुरानी आवासीय सोसाइटियों तथा अतिक्रमण प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति का मसौदा जनप्रतिनिधियों, नगर निकायों और आम नागरिकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम रूप से तैयार किया जाए तथा शीघ्र मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाए।
