Bareilly : बवाल के आरोपियों की पेशी को लेकर अलर्ट रहा खुफिया विभाग

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। शहर में 26 सितंबर को जुमे की नमाज के बाद पुलिस पर पथराव और फायरिंग के मामले में फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां समेत अन्य 39 आरोपियों की मंगलवार को पेशी को लेकर खुफिया विभाग और पुलिस भी पूरी तरह से सक्रिय रही। खुफिया विभाग समेत पुलिस की टीमें सादे कपड़ों में कोर्ट परिसर के आस-पास मौजूद रह कर पैनी नजर बनाए रहीं। मौलाना तौकीर पर दर्ज अन्य मुकदमों में जल्द कोर्ट में पेशी हो सकती है। बवाल के छह मामलों में उनकी मंगलवार को जेल से वीडियो क्रॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट में पेशी हुई, जबकि अन्य आरोपियों की व्यक्तिगत रूप से पेशी हुई।

बता दें कि 26 सितंबर को आई लव मुहम्मद के विवाद के समर्थन में इत्तेहाद-ए-मिल्लत कौंसिल (आईएमसी) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां के बुलावे पर हजारों की संख्या में भीड़ जुटी थी। मौलाना के नदारद रहने से भीड़ बेकाबू हो गई। पुलिस का दावा है कि भीड़ ने दुकानों और वाहनों में तोड़फोड़ की थी। इस दौरान उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव कर फायरिंग भी की थी। बवाल के दिन ही शहर के अलग-अलग थानों में पुलिस ने 10 मुकदमे दर्ज किए थे। बाद में एक और मुकदमा लिखा गया। कोतवाली में दर्ज मुकदमे में मौलाना तौकीर को मुख्य आरोपी बनाया गया है। अन्य मुकदमों में साजिशकर्ता के तौर पर नाम खोला गया है। बवाल के अगले दिन 27 सितंबर को पुलिस ने तौकीर रजा को गिरफ्तार किया था। सुरक्षा की दृष्टि से मौलाना तौकीर रजा को फतेहगढ़ जेल में रखा गया है। बवाल करने के आरोप में तौकीर रजा के कई करीबियों समेत अब तक सौ से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

बवाल से जुड़े मामलों में मंगलवार आरोपियों की रिमांड को लेकर कोर्ट में सुनवाई थी। आरोपियों की पेशी के मद्देनजर सुबह से खुफिया एजेंसियां सतर्क रहीं। सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय पुलिस भी सादे वर्दी में मौजूद रही। मौलाना तौकीर रजा की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई, जबकि बवाल में शामिल 39 अन्य आरोपियों की व्यक्तिगत पेशी हुई। आरोपियों को कड़ी सुरक्षा में सुनवाई के लिए कोर्ट में लाया गया। सुनवाई के बाद सभी को वापस भेज दिया गया।

आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ 1982 से लेकर अब तक करीब 17 मुकदमे दर्ज हैं। उधर बवाल के बाद तौकीर रजा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और प्रशासन ने उनकी अवैध संपत्तियों पर भी कार्रवाई शुरू कर दी थी। पुलिस, बीडीए और नगर निगम की संयुक्त टीम अब तक करीब 250 करोड़ रुपये की संपत्ति को सील कर चुकी है। इसके अलावा उनकी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. नफीस अहमद के पांच करोड़ के बरात घर को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया था। वहीं, तौकीर रजा के भतीजे और सपा पार्षद ओमान रजा के अवैध चार्जिंग स्टेशन को भी प्रशासन ने पूरी तरह से जमीदोंज कर दिया था।

2001 में बनाई थी पार्टी, 20 सीटों पर लड़ा था चुनाव
आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने वर्ष 2001 में क्षेत्रीय दल के रूप में एक पार्टी बनाई थी। इसका नाम इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) रखा था। 16वीं विधानसभा में इस पार्टी ने यूपी की 20 विधानसभा सीटों पर चुनाव भी लड़ा था। इसमें पार्टी को कुल 1 लाख 90 हजार 844 वोट मिले थे। बरेली की भोजीपुरा सीट से पार्टी के प्रत्याशी शहजिल इस्लाम चुनाव जीत गए थे। हालांकि, बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे। यूपी में जिसकी सरकार रही, तौकीर रजा ने उसको समर्थन दिया था। फिर चाहे कांग्रेस-सपा हो या बसपा। हालांकि इस मामले में भाजपा अपवाद है। 2009 में तौकीर रजा कांग्रेस के साथ हुए। 2012 में उन्होंने सपा को समर्थन दिया। यूपी में सपा की सरकार बनी तो तौकीर रजा को हथकरघा विभाग का उपाध्यक्ष बनाया गया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा को समर्थन दिया था। सितंबर-2025 में चुनाव आयोग ने 121 राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया था। वजह ये है कि इन्होंने 6 साल से कोई चुनाव नहीं लड़ा था। इन दलों की सूची में तौकीर रजा की आईएमसी पार्टी का भी नाम शामिल था।

दंगे में तौकीर रजा को मिली थी तीन दिन में जमानत
ध्यान रहे कि जिले में साल 2010 में जुलूस-ए-मोहम्मदी निकला था। इस दौरान कई स्थानों पर हिंसा हुई थी। इतना ही नहीं चार थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू तक लगाना पड़ा था। पुलिस ने 8 मार्च, 2010 को मौलाना तौकीर रजा को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाया था। उस वक्त प्रदेश में बसपा सरकार थी। उस वक्त मौलाना तौकीर रजा खां का रसूख इतना था कि उन्हें तीन दिन बाद ही यानि 11 मार्च को जमानत मिल गई थी और वह जेल से बाहर आ गए थे। इसके बाद शहर फिर से धधक उठा था। 12 और 13 मार्च, 2010 को बरेली में फिर से कई जगह हिंसा और आगजनी हुई थी।

 

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