पीलीभीत: मंडी में धान के ढेर में दबी पर्चियां बयां कर रही हकीकत, कुछ किसानों का महज 1200 में बिका धान!
पीलीभीत, अमृत विचार। सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद धीरे-धीरे तेजी पकड़ रही है। क्रय केंद्रों पर धान की तौल कराई जा रही है, लेकिन उससे कई गुना अधिक धान आढ़तों पर पटा हुआ है। मंडी में सरकारी केंद्रों से हटकर धान की कीमत बेहद कम दी जा रही है। व्यापारी भले इसे नमी अधिक होने की बात कहें, लेकिन किसान को फसल की लागत निकालना मुश्किल पड़ रहा है।
दावे दो हजार रुपये से अधिक दिलाने के किए जाते रहे हैं लेकिन मंडी में आढ़तों के बाहर पड़े धान के ढेरों में दबी बिक्री से जुड़ी पर्चियां हकीकत बयां कर रही है। कई किसानों का धान तो महज 1200 रुपये प्रति क्विंटल में ही बिका। फिलहाल जिम्मेदार अभी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा सके हैं। हर बार की तरह इस बार भी अधिकांश किसान क्रय केंद्र से दूरी बनाए दिख रहे हैं। उनको क्रय केंद्रों तक लाने में अभी जिम्मेदार पूरी तरह से कामयाब नहीं हो सके हैं।
मंडी समितियों में धान की आवक 15 सितंबर के आसपास से शुरू हो गईथी। हालांकि शुरुआती समय में बाढ़ -बारिश के चलते फसल भीगने पर कई किसानों को धान कटवाना पड़ गया था। उस वक्त नमी की मात्रा काफी अधिक होने पर धान की कीमत बेहद कम रही। तीन अक्टूबर से सरकारी धान खरीद शुरू हो चुकी है। इसे 12 दिन बीत चुके हैं। 132 क्रय केंद्रों पर पचास हजार मीट्रिक टन से अधिक धान सरकारी केंद्रों पर खरीदा जा चुका है।
मंडी में एक सप्ताह से बड़ी मात्रा में धान की आवक हो रही है। जिसमें एक अनुमान लगाया जाए तो क्रय केंद्रों से अधिक धान अभी भी आढ़तों पर बिक रहा है। दावे कुछ भी कर दिए जाएं लेकिन मंडी में आढ़तों के बाहर लगे धान के ढेरों में दबी पर्चियां देखें तो न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 के बजाए 1800 रुपये तक ही दाम मिल पा रहा है। बुधवार को तो कई ढेर 1700 से 1775 तक बेचे गए थे।
गौटिया के किसान गया प्रसाद का धान तो सिर्फ 1200 रुपये क्विंटल में ही बिका। बंग्ला के राजेंद्र का धान 1725 रुपये में बिका। इसी तरह से अन्य ढेरों की भी कीमत अठारह सौ से कम ही रही। फिलहाल डिप्टी आरएमओ वीके शुक्ला का कहना है कि मानक के अनुरूप नियम प्रक्रिया अपनाते हुए जो धान क्रय केंद्र पर आ रहा है, उसको खरीदा जा रहा है। सरकारी खरीद भी लगातार बढ़ रही है।
नमी मापने की भी नहीं जरूरत, खाकर ही बता दे रहे स्थिति
आढ़तों पर बोली लगाकर बिकने वाले धान की कीमतें काफी कम मिल रही है। इसमें किसान को ये तो बताया जा रहा है कि उसके धान में नमी अधिक है। मगर, ये नमी किसी यंत्र से मापी ही नहीं जा रही है। आढ़तों पर मौजूद कुछ लोग धान के ढेर से एक-दो तिनके उठाकर मुंह डालकर नमी का आकलन कर रहे हैं। किसान भी कम दाम पर फसल बिकने के बाद इतना ही बता पा रहा है कि धान में नमी अधिक थी, लेकिन कितनी अधिक है, ये उसको भी नहीं पता है।
बोली के नाम पर भी निभा रहे महज औपचारिकता
मंडी समिति में धान की बोली लगाई जा रही है। मगर, ये महज औपचारिकता में सिमटी हुई है। खरीद से जुड़े अधिकारियों की मानें तो इस दौरान उनके कर्मचारी भी मौजूद रहते हैं। मगर, अधिकांश जगह बोली लगाने वालों के बीच कोई कर्मचारी नहीं दिखता। ये बात आढ़ती भी दबी जुबां से बता रहे हैं। उनका भी यही कहना है कि अगर बोली लगाने के दौरान ही जिम्मेदार मौजूद रहेंगे तो कुछ और राहत किसान को मिल सकती है।
