सेहत : जीवनशैली में बदलाव व अनुवांशिक कारण से बढ़ रहे स्पाइन ट्यूमर रोगी, ऐसे करें बचाव
जीएसवीएसएस पीजीआई में प्रतिमाह 60 से 65 लोगों की हो रही सर्जरी
कानपुर, अमृत विचार। जीवनशैली में बदलाव, तनाव, प्रदूषण, गलत खानपान, सही तरीके से न बैठना व लेटना और गड्ढों की वजह से लोगों में स्पाइन संबंधित समस्या बढ़ रही है। इसके अलावा स्पाइन में ट्यूमर की समस्या भी अब लोगों में अधिक देखी जा रही है, जिनमे पुरुषों की संख्या अधिक है। ऐसे में बचाव करना बेहद जरूरी हैं।
वहीं, कुछ लोगों में जेनेटिक कारणों की वजह से भी स्पाइन संबंधित दिक्कत या स्पाइन में ट्यूमर का सामना करना पड़ रहा है। जीएसवीएसएस पीजीआई में मरीजों की संख्या को देखते हुए स्पाइन का विभाग अलग बनाया गया है। वर्तमान में स्पाइन की ओपीडी में प्रतिदिन तीन सौ से लेकर साढ़े तीन सौ मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमे से प्रतिदिन 60 से 70 मरीजों की स्पाइन सर्जरी की जा रही है, जिनमे से 10 से 15 मरीज स्पाइन ट्यूमर से ग्रस्त होते हैं।
पीजीआई के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि बार-बार वाहन गड्ढे में जाने की वजह से लोगों के स्पाइन में समस्या हो रही है। इसके अलावा जीवनशैली में बदलाव और आनुवंशिक कारण दोनों ही रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर के बढ़ते मामलों में योगदान करते हैं। आनुवंशिक स्थितियों जैसे न्यूरो फाइब्रोमैटोसिस और वॉन हिप्पेल-लिंडौ सिंड्रोम से जोखिम बढ़ सकता है, जबकि अस्वास्थ्यकर जीवनशैली की आदतें जैसे गतिहीन जीवन, गलत मुद्रा या भारी वजन उठाना रीढ़ की हड्डी पर दबाव डालकर जोखिम को बढ़ाने का काम करती है।
इसके अलावा डीएनए में असामान्य या आनुवंशिक परिवर्तन अनियंत्रित कोशिका विभाजन का कारण से ट्यूमर बन सकते हैं। ऐसे में खानपान दुरस्त रखना बेहद जरूरी है। ताकि स्पाइन संबंधित दिक्कतों का सामना न करना पड़े। वहीं, लंबे समय तक बैठे रहना और कम शारीरिक गतिविधियां भी रीढ़ की हड्डी पर तनाव बढ़ाने का काम करती हैं।
35 साल बाद डिस का लचीलापन हो जाता कम
डॉ.मनीष सिंह ने बताया कि 35 साल की उम्र के बाद रीढ़ की डिस्क का लचीलापन कम हो जाता है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ ऊतकों में पानी की कमी, जोड़ों की जकड़न और मांसपेशियों में लचीलेपन की कमी हो जाती है। क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ डिस्क और आसपास के ऊतकों में पानी की कमी हो जाती है।
सामान्य उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के कारण जोड़ों की अकड़न भी लचीलेपन में कमी का कारण बनती है। मांसपेशियां, टेंडन और अन्य संयोजी ऊतक उम्र के साथ सख्त हो जाते हैं। इस वजह से बाइक व स्कूटी गड्ढें में बार-बार गुजरने की वजह से डिस्क अपने एरिया से खिसक जाती है, जिसकी वजह से संबंधित को दिक्कत होती है।
मुख्य लक्षण
- गर्दन, पीठ या कूल्हों में लंबे समय तक दर्द रहना।
- पैरों में सुन्नता, झुनझुनी या कमजोरी महसूस होना।
- चलने में लड़खड़ाहट या असंतुलन होना।
- लेटने पर रात को पीठ व कमर में दर्द का बढ़ना।
- पेशाब करने में कठिनाई (असंयम)।
- नसों पर दबाव से हाथ-पैरों में अचानक दर्द होना या ठंडा पड़ना।
- संवेदना का एहसास कम होना।
ऐसे करें बचाव
- नियमित रूप से व्यायाम जरूर करें।
- बैठते व खड़े होते समय सही मुद्रा बनाए रखने की आदत डालें।
- योग, ध्यान और गहरी सांस लेने के व्यायाम करें, ताकि तनाव कम हो।
- अपने वजन पर नियंत्रण जरूर बनाकर रखें।
- भारी वजन उठाते समय, सही तरीका अपनाएं।
- किसी भी प्रकार लक्षण नजर आने पर नियमित जांच कराएं।
