हाईकोर्ट ने 100 करोड़ के घोटाले मामले में AAP नेता मोहम्मद कादिर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निवेशकों से 100 करोड़ रुपये की ठगी के आरोप में घिरे फ्रीचार्ज पेएलएलपी फर्म से जुड़े आम आदमी पार्टी नेता मोहम्मद कादिर को बड़ी राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि अपराध अत्यंत गंभीर है तथा आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है।
कोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए पाया कि याची के खिलाफ प्रयागराज के शाहगंज थाने में दर्ज एफआईआर की विवेचना चल रही है। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट गैर-जमानती वारंट जारी कर चुका है तथा कुर्की की कार्यवाही भी प्रारंभ हो गई है। ऐसे में अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा।
उक्त आदेश न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने मोहम्मद कादिर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए पारित किया। हालांकि याची कादिर की ओर से तर्क दिया गया कि उसका फर्म से कोई संबंध नहीं है और न ही वह भागीदार के रूप में जुड़ा है। उसने आरोप लगाया कि सहअभियुक्त मोहम्मद काशिफ एवं मोहम्मद आसिफ ने निवेशकों से पैसा जमा कराया है और उसी धन का दुरुपयोग किया गया।
दूसरी ओर विवेचना के दौरान दर्ज बयानों में निवेशकों ने बताया कि उन्होंने कादिर के कहने पर ही फर्म में पैसा जमा किया था। आरोप है कि फर्म ने भारी मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये इकट्ठा किए और बाद में गबन कर लिया। वहीं दूसरी तरफ सरकारी अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि कादिर फर्म का संस्थापक रहा है और वह कानूनी प्रक्रिया से बचने की कोशिश कर रहा है। उसने जांच में भी सहयोग नहीं किया है।
इस पर कोर्ट ने माना कि आर्थिक अपराधों में आरोपी की भूमिका केवल तकनीकी भागीदारी से नहीं तय होती, बल्कि दूसरों पर पड़ने वाले उसके प्रभाव, निवेशकों को विश्वास दिलाने तथा जांच में उसके व्यवहार से भी आंकी जाती है। यदि आरोपी स्वयं को अलग बताकर कानूनी प्रक्रिया से बचने की कोशिश करे तो यह न्याय के विरुद्ध है। अंत में कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
