तांत्रिक अनुष्ठानों का वक्त आया, ''उल्लू'' की जान पर खतरा मंडराया... दीपावली आते ही खतरे में पड़ जाती है प्रतिबंधित पक्षी की जान

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
On

शेड्यूल वन में शामिल उल्लू को पालना, खरीदना, बेचना और शिकार करना अपराध, जेल भेजे जाने के साथ लग सकता है भारी जुर्माना

लखनऊ, अमृत विचार: दीपावली पर तांत्रिक क्रियाओं और अनुष्ठानों करने वालों की नजर धन की देवी महालक्ष्मी के वाहन ''उल्लू'' पर है। इसे देखते हुएवन विभाग सतर्क हो गया है। कर्मचारियों को विशेष अलर्ट पर रखते हुए जनता से अपील की गई है कि वे उल्लू की पूजा, घर पर पालने या खरीदने की किसी भी कोशिश न करें, क्योंकि ये गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

दीपावली पर प्रतिबंधित पक्षी उल्लू की कीमत मुंहमांगी हो जाती है। 20 हजार से शुरू होकर एक लाख तक की कीमत इस विशेष पक्षी की हो जाती है। सबसे पवित्र कहा जाने वाला बार्न उल्लू भदोही में देखा गया है। जिसे एक पवित्र उल्लू माना जाता है, और यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची तीन में शामिल किया गया है। इसके अलावा मोटल्ड वुड को लोगों ने प्रयागराज में देखा है। इसे दुर्लभ और लुप्तप्राय श्रेणी में रखा गया है।

30 से 34 प्रजातियां वन नियमों की अनुसूची में

30-34 में से कई उल्लू की प्रजातियां वन नियमों, अनुसूची में सूचीबद्ध हैं। उन्हें पालना, खरीदना, बेचना या मारना अपराध है। ऐसे उल्लंघन पर कड़ी सजा, जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

पक्षी बाजारों पर वन विभाग की नजर

लखनऊ में पक्षियों का बाजार चौक, नक्खास और नींबू पार्क में लगता है। वन विभाग ने शिकार और व्यापार पर रोक लगाते हुए इनकी बिक्री पर नजर रखने के लिए सभी वन रेंजर्स और मुखबिर तंत्र को अलर्ट कर दिया है।

वन विभाग की सलाह

-दीपावली पर उल्लू को शुभ मानकर खरीदने, पालने या शिकार करने की कोशिश न करें।

-यदि किसी ने उल्लू को बंद कर रखा है या बेचने की कोशिश कर रहा है तो लोग वन विभाग और पुलिस को सूचित करें।

-घायल या असहाय हालत में मिले यह पक्षी तो उसे स्वयं पकड़ने के बजाय वन अधिकारियों या नजदीकी पक्षी जीव संरक्षण केंद्र को कॉल करें।

-बच्चों और पूजा करने वालों को एहसास दिलाएं कि जंगली जानवरों का घर से बाहर पकड़ना उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है और यह अपराध भी हो सकता है।

दीपावली पर्व पर तांत्रिक क्रियाओं और धन प्राप्ति सहित कई मनोकामनाओं के लिए प्रतिबंधित प्रजाति के उल्लू का शिकार और गुपचुप तरीके से व्यापार किए जाने की सूचनाएं आती हैं। ऐसी स्थिति को देखते हुए सूचना तंत्र को मजबूत बनाते हुए अपने-अपने कार्यक्षेत्र में वनकर्मियों को सघन गश्त और कार्रवाई करने को कहा गया है।

सितांशु पाण्डेय, डीएफओ

 

संबंधित समाचार