अमृत विचार की खबर का असर: पशुओं के उपचार के नाम से चल रहे नियम विरुद्ध NGO, DM ने लिया संज्ञान, अब होगी जांच

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Published By Muskan Dixit
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सीवीओ देंगे रिपोर्ट, नगर और ग्रामीण क्षेत्र से जुटाएंगे जानकारी

लखनऊ, अमृत विचार : अमृत विचार में 23 अक्टूबर को प्रकाशित ''बेजुबानों की जान से खेल रहीं स्वयं सेवी संस्थाएं'' खबर का जिलाधिकारी विशाख जी ने संज्ञान लेकर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेश वर्मा से जांच करा रिपोर्ट मांगी है। जल्द नियम विरुद्ध कार्य करने वाली संस्थाओं पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

ज्यादातर एनजीओ शेल्टर होम के नाम पर अस्पताल बनाकर नगर और ग्रामीण क्षेत्र में घायल, लाचार व बीमार पशुओं को लाकर स्वयं या फिर झोलाछाप से इलाज कराकर उनकी जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। सड़क से उठाने, उपचार करने से लेकर मरने तक अंतिम संस्कार के नाम पर सोशल मीडिया के माध्यम से पशु प्रेमियों से रुपये मांगते हैं। इनमें कुछ कथित पशु प्रेमी भी शामिल हैं जो तड़पते पशुओं का उपचार कराने और शेल्टर होम भेजने के लिए सांसे चलने और मरने तक चंदा करते हैं। लेकिन इलाज नहीं कराते और नगर निगम या सरकारी डॉक्टर के पहुंचने पर विरोध लौटा देते हैं। कारण पशुओं के गोशाला पहुंचने या ठीक होने पर वसूली बंद हो जाती है।

क्रूरता के शिकार पशुओं का नहीं कराते पोस्टमार्टम

एनजीओ क्रूरता का शिकार हुए पशुओं का मरने पर न पोस्टमार्टम कराते न ही वैज्ञानिक विधि से अंतिम संस्कार करते हैं। शव निस्तारण की नगर निगम, नगर पंचायत व ग्राम पंचायतों को सूचना नहीं देते हैं। हालांकि इस मामले पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने अपने चिकित्सक, नगर निगम, नगर पंचायत और ग्राम पंचायत से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जंगली पशु और राष्ट्रीय पक्षी तक का करते रेस्क्यू

ज्यादातर एनजीओ मोर, सारस समेत अन्य जंगली जानवर का नियमविरुद्ध रेस्क्यू करके खुद या निजी चिकित्सक से इलाज कराते हैं। जबकि इसकी सूचना वन विभाग को देनी होती है। वन विभाग की सहमति और सामंजस्य से पंजीकृत एनजीओ यह प्रक्रिया कर सकते हैं। पशुओं के ठीक होने पर उन्हें वन विभाग को सुपुर्द करना होता है, जिसे विभाग उनके प्राकृतिक वास में छोड़ता है। जबकि प्राथमिकता से वन विभाग स्वयं पशुओं का रेस्क्यू करके सरकारी चिकित्सक से उपचार कराते हैं और अपने पास रखते हैं। उनके ठीक न होने पर उच्च स्तर से स्वीकृति लेकर चिड़िया घर में संरक्षित करते हैं।

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