Ayodhya News: तिलोदकी गंगा नदी के कायाकल्प के लिए मांगा छह माह का समय, हरित न्यायाधिकरण की सुनवाई में कई मुद्दों पर हुई चर्चा

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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प्रशासन ने प्रस्तुत की अब तक कराए गए कार्यों की रिपोर्ट

अयोध्या, अमृत विचार: अयोध्या की पौराणिक तिलोदकी गंगा के पुनरुद्धार/कायाकल्प के लिए छह महीने का समय तय किया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सुनवाई में जिला प्रशासन ने इसके कायाकल्प के लिए छह महीने का समय लिया है। अब तिलोदकी गंगा के पुनरुद्धार को लेकर काम तेज किया जाएगा। हालांकि प्रशासन ने एनजीटी की सुनवाई शुरू होने के साथ ही बारिश के पहले इस पर काम शुरू कर दिया था, लेकिन अब समयबद्ध ढंग से काम होगा।

अतीत में प्रशासन और दूसरे विभागों ने सोहावल के पंडितपुर में रमणक ऋषि की तपस्थली से निकलने वाली पौराणिक तिलोदकी गंगा नदी को नदी नहीं मान रहा था, जबकि पुराणों में इसका विस्तृत उल्लेख है। इसी को लेकर मामला एनएजीटी में पहुंचा। एनजीटी ने गंजा गांव के पास प्रदूषित जलभराव को लेकर पहले आदेश किया तो सिंचाई विभाग ने नदी के स्थान पर बिना सोचे समझे पक्का नाला बना डाला। वादी दुर्गा प्रसाद की शिकायत के बाद एनजीटी ने तिलोदकी गंगा नदी के पुनरुद्धार को लेकर पिछली सुनवाई में फिर आदेश जारी किया था। कहा था कि वादी के साक्ष्यों के आधार पर इसका पुनरुद्धार कराया जाए।

जिलाधिकारी निखिल टी.फुंडे और सीडीओ कृष्ण कुमार सिंह ने तिलोदकी गंगा को एक जिला एक नदी योजना में शामिल किया। दोनों अफसरों ने बारिश के पहले पहले चरण में लगभग सात किमी निरीक्षण के बाद काम शुरू कराया। इसकी रिपोर्ट एनजीटी को भेजा। वादी दुर्गा प्रसाद ने बताया कि एनजीटी की सुनवाई में तिलोदकी गंगा नदी के पुनरुद्धार/कायाकल्प के लिए प्रशासन ने छह महीने का समय मांगा। न्यायाधिकारण ने विचार के लिए तीन महीने पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के साथ समय स्वीकार कर लिया है।

गत दिनों इस मुद्दे पर हुई थी बहस

पिछले दिनों एनजीटी के जस्टिस अरुण कुमार त्यागी, ज्यूडिशियल मेंबर ईश्वर सिंह ने सुनवाई की। सुनवाई में वादी दुर्गा प्रसाद, प्रशासन की ओर से अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व महेंद्र कुमार सिंह, सिंचाई विभाग के अधिकारी सहित अन्य लोग वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए शामिल हुए। सुनवाई के दौरान एक बार फिर नाला और नदी के साथ सिंचाई विभाग से नदी के स्थान पर नाला बनाने के मुद्दे पर बहस हुई। जमीन संबंधी कुछ समस्याएं भी गिनाई गई। न्यायालय ने नदी के कायाकल्प को लेकर जिला प्रशासन से जानकारी चाही। प्रशासन की ओर से इसके पुनरुद्धार/कायाकल्प के लिए छह महीने का समय मांगा गया।न्यायाधिकरण ने छह महीने का समय इस शर्त के साथ स्वीकार किया है कि तीन महीने की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। न्यायाधिकरण आदेश के मुताबिक कार्यों की प्रगति पर विचार करेगा।

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