Chhath Puja: ‘नहाय-खाय’ से की पवित्र पर्व की शुरुआत, बाजारों में छाई रौनक
लखनऊ, अमृत विचारः लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा शनिवार से श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गया। सूर्य उपासना का यह पर्व चार दिनों तक चलता है और 28 अक्टूबर मंगलवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूरा होगा।
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पहले दिन नहाय-खाय के रूप में मनाया गया। व्रतियों ने प्रातःकाल गोमती नदी और गंगाजल से स्नान किया। स्नान के बाद शुद्ध, सादा और साफ वस्त्र धारण करके रसोई और पूजा स्थल की सफाई की।
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माना जाता है कि छठी मैया स्वच्छता और पवित्रता की प्रतीक हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की अशुद्धि अस्वीकार्य मानी जाती है।
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व्रतियों ने एक बार भोजन किया, जिसे ‘नहाय-खाय का प्रसाद’ कहा जाता है। व्रतियों भोजन कांसे, पीतल के बर्तनों में और मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी या गोबर के उपलों से पकाया, क्योंकि इन्हें सात्विक और शुद्ध माना गया है। भोजन में कद्दू की सब्जी, चने की दाल और सादा चावल शामिल रहा।
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व्रतियों ने आने वाले तीन दिनों तक शुद्धता, संयम और भक्ति का पालन करने का छठ व्रत का संकल्प लिया। छठ महापर्व में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा का विशेष विधान है। यह पर्व मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के लिए रखा जाता है।
