Bihar Election: नालंदा में आठवीं जीत की दहलीज पर नीतीश के 'श्रवण', दसवीं बार मैदान में हरिनारायण सिंह, देखें चुनावी रिपोर्ट

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में छह नवंबर को मतदान होने वाले नालंदा जिले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी मंत्री श्रवण कुमार आठवीं बार और पूर्व मंत्री हरिनारायण सिंह दसवीं बार जीत की राह पर हैं। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहरों वाले इस जिले की सात विधानसभा सीटों—नालंदा, हरनौत, बिहारशरीफ, राजगीर (सुरक्षित), अस्थावां, हिलसा और इस्लामपुर—पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग), महागठबंधन और क्षेत्रीय दलों के प्रत्याशियों का प्रचार जोरों पर है। राजग का पलड़ा भारी है। पांच सीटें जदयू की, एक भाजपा की और एक राजद की।

मुख्यमंत्री का गृह जिला होने से सभी नजरें नालंदा पर टिकी हैं। नालंदा सीट से जदयू के श्रवण कुमार सात बार के विजेता हैं। वे 1995, 2000, फरवरी-2005, अक्टूबर-2005, 2010, 2015 और 2020 में जीते। 2020 में जनतांत्रिक विकास पार्टी के कौशलेंद्र कुमार को हराया था। इस बार महागठबंधन की ओर से कांग्रेस ने कौशलेंद्र कुमार को ही उतारा है। सीट पर 10 उम्मीदवार हैं।

हरनौत नीतीश का गृह क्षेत्र है; उनका पैतृक गांव कल्याण बिगहा यहीं है। जदयू ने नौ बार जीते हरिनारायण सिंह को मैदान में उतारा है। वे चंडी से 1977, 1983 (उपचुनाव), 1990, 2000, फरवरी-2005, अक्टूबर-2005 और हरनौत से 2010, 2015, 2020 में विजयी रहे। इस बार जीतेंगे तो दस बार के रिकॉर्डधारी बनेंगे—अब तक नौ बार जीत का रिकॉर्ड हरिनारायण, सदानंद सिंह और रमई राम (दिवंगत) के नाम है। मुकाबला कांग्रेस के अरुण कुमार से। 2020 में लोजपा की ममता देवी को हराया था। सीट पर 11 उम्मीदवार।

बिहारशरीफ में भाजपा के मौजूदा विधायक एवं मंत्री डॉ. सुनील कुमार लगातार पांचवीं जीत (फरवरी-2005, अक्टूबर-2005, 2010, 2015, 2020) के लिए मैदान में। 2020 में राजद के सुनील कुमार को हराया। इस बार कांग्रेस ने नया चेहरा उमैद खान उतारा; भाकपा के शिव कुमार यादव वोट काट सकते हैं। 10 उम्मीदवार।

राजगीर (सुरक्षित) में जदयू के कौशल किशोर (हरियाणा के पूर्व राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य के पुत्र) और भाकपा (माले) के विश्वनाथ चौधरी में सीधी टक्कर। 2015 में जदयू ने भाजपा के सत्यदेव आर्य को 5,390 मतों से हराया था। 2020 में जदयू ने कांग्रेस के रवि ज्योति को पराजित किया। सत्यदेव आर्य 1977 से 2010 तक कई बार जीते। सात उम्मीदवार।

अस्थावां से जदयू के जितेंद्र कुमार पांच बार के विजेता (फरवरी-2005, अक्टूबर-2005, 2010, 2015, 2020) छठी जीत चाहते हैं। राजद ने रवि रंजन कुमार, जनसुराज ने आरसीपी सिंह की बेटी लिपि सिंह उतारी—मुकाबला त्रिकोणीय। 2020 में राजद के अनिल कुमार को हराया। सात उम्मीदवार।

इस्लामपुर में जदयू ने पूर्व विधायक राजीव रंजन के बेटे रुहेल रंजन को उतारा; मुकाबला राजद के मौजूदा विधायक राकेश कुमार रोशन (पूर्व विधायक कृष्ण बल्लभ के बेटे) से। 2020 में राजद ने पहली बार कब्जा जमाया, जदयू के चंद्रसेन को हराया। जदयू ने पहले पांच बार जीती थी। 13 उम्मीदवार।

हिलसा में जदयू के कृष्ण मुरारी शरण और राजद के अत्रि मुनि उर्फ शक्ति सिंह यादव फिर आमने-सामने। 2020 में जदयू ने 12 वोट से जीता सबसे रोचक मुकाबला। 10 उम्मीदवार।

2025 का चुनाव कांटे का है; राजग और महागठबंधन दोनों के लिए प्रतिष्ठा दांव पर।

नालंदा ऐतिहासिक वैभव का प्रतीक है। आठवीं से 12वीं शताब्दी तक विश्वविद्यालय में कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, फ्रांस, तुर्की से 10,000 छात्र पढ़ते थे; 2,000 शिक्षक थे। मगध साम्राज्य की राजधानी राजगृह (राजगीर) चंद्रगुप्त मौर्य की मातृभूमि और चाणक्य की कर्मभूमि रही। पांच पहाड़ियों से घिरा राजगीर जैन तीर्थंकर महावीर और बुद्ध की साधना स्थली है। पांडु पोखर और पावापुरी जल मंदिर महाभारत कालीन और जैन मोक्ष स्थल हैं। खंडहर विश्वविद्यालय का पुनरोद्धार जारी है।

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