Bareilly : रामगंगा नदी के किनारों पर बनेगा नो कंसट्रक्शन, नो डेवलपमेंट जोन
बरेली, अमृत विचार। रामगंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र को नो कंसट्रक्शन, नो डेवलपमेंट जोन बनाने की कवायद जल्द शुरू होगी। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (एनआईएच) रुड़की की टीम ने बिजनौर से लेकर कन्नौज तक रामगंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र का सर्वे पूरा कर सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड को ड्राफ्ट रिपोर्ट भेजी है। विभाग को अब फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। इसके बाद शासन से बजट आवंटित होते ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के चिह्नीकरण के लिए पिलर लगाने का कार्य शुरू करेगा। जो निर्माण बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में होंगे, जिला प्रशासन उन्हें हटाने की कार्रवाई भी करेगा।
शासन के निर्देश पर अप्रैल 2024 से एनआईएच की टीम ने रामगंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र का सर्वे शुरू किया था। एनआईएच ने सर्वे ऑफ इंडिया और रिमोट सेंसिंग से डाटा लेने के बाद बाढ़ खंड के अधिकारियों से संपर्क किया और बिजनौर से लेकर कन्नौज तक 640 किमी एरिया में रही रामगंगा नदी के किनारे बाढ़ संभावित क्षेत्र का सर्वे किया। यह काम मई 2025 में पूरा हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, जिले की चार तहसीलों के 166 ग्राम फ्लड प्लेन जोन की सीमा में आ रहे हैं। इनमें तहसील सदर के 52 ग्राम, आंवला के 43 ग्राम, फरीदपुर के 28 ग्राम और मीरगंज के 43 ग्राम शामिल हैं।
बाढ़ खंड के एई अमित कुमार ने बताया कि एनआईएच ने ड्राफ्ट रिपोर्ट भेजी है। अब केवल फाइनल रिपोर्ट मिलने का इंतजार है। इसके बाद बजट आवंटन के लिए शासनादेश जारी होते ही रामगंगा नदी के किनारे सीमांकन पिलर लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। कहा कि पिलर लगाने से नदी के किनारे के क्षेत्रों में अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर जहां रोक लग सकेगी। वहीं, बाढ़ के समय जान-माल की हानि को कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही तय हो जाएगा कि डूब क्षेत्र में कितने लोगों ने निर्माण कराया है। निर्माण कराने वाले सैकड़ों लोगों पर प्रशासन कार्रवाई करेगा। संभावना है कि बरसात से पहले यह काम पूरा हो जाएगा और नदी के किनारे के क्षेत्रों में रहने वालों को सुरक्षित किया जा सकेगा।
