UP: 25 को होगी जामा मस्जिद बनाम नीलकंड महादेव मंदिर मामले की सुनवाई
बदायूं, अमृत विचार। अदालत ने नीलकंठ महादेव मंदिर बनाम शम्सी जामा मस्जिद मामले में सुनवाई 25 नवंबर को होगी। सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक पुष्पेंद्र चौधरी इस मामले पर सुनवाई करेंगे कि क्या किसी अधीनस्थ अदालत को नीलकंठ महादेव मंदिर और शम्सी जामा मस्जिद मामले की सुनवाई का अधिकार है। न्यायाधीश चौधरी ने केस फाइल की समीक्षा के बाद मामले को 25 नवंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
अपर दीवानी न्यायाधीश, सीनियर डिवीजन सुमन तिवारी के मातृत्व अवकाश पर जाने के कारण मुकदमे की फाइल त्वरित अदालत में स्थानांतरित कर दी गई थीं। अखिल भारत हिंदू महासभा के तत्कालीन संयोजक मुकेश पटेल ने साल 2022 में दावा किया था कि जामा मस्जिद शम्सी स्थल पर नीलकंठ महादेव मंदिर मौजूद है। उन्होंने पूजा करने की अनुमति मांगी। शम्सी जामा मस्जिद प्रबंधन समिति के वकील अनवर आलम ने दलील दी कि उच्चतम न्यायालय का आदेश अधीनस्थ अदालतों को ऐसे विवादों की सुनवाई करने से रोकता है। उन्होंने 1991 के पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम का हवाला देते हुए आवेदन प्रस्तुत किया था।
कहा कि उच्चतम न्यायालय देश की सभी अदालतों को पहले ही निर्देश दे चुका है कि वह उन मामलों में कोई आदेश पारित न करें जिनमें 1991 का अधिनियम लागू होता है। इस सुनवाई को आगे न बढ़ाया जाए। मामले को खारिज कर दिया जाना चाहिए। हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं ने कहा कि मामले की सुनवाई उसके गुण-दोष के आधार पर होनी चाहिए। अब इस मामले की सुनवाई 25 नवंबर को नए सिरे से होगी जिससे यह तय किया जा सके कि अधीनस्थ अदालत इस पर सुनवाई जारी रख सकती है या नहीं।
मंदिर का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता वेद प्रकाश साहू ने कहा कि यह मामला पहले त्वरित अदालत में था। फिर दीवानी न्यायाधीश, सीनियर डिवीजन को स्थानांतरित कर दिया गया। बाद में न्यायाधीश सुमन तिवारी के अवकाश पर जाने के बाद त्वरित अदालत में वापस भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि 25 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई अदालत में अवकाश के कारण नहीं हो सकी।
