लखनऊ में वेंटिलेटर उपलब्धता पर हाईकोर्ट ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट, राज्य सरकार और सरकारी अस्पतालों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
लखनऊ, अमृत विचार: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता और आवश्यकता के संबंध में राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने कोविड-19 महामारी के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में किसी आपात स्थिति की स्थिति में वेंटिलेटर की त्वरित उपलब्धता हेतु राज्य सरकार को ठोस तंत्र विकसित करना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि राज्य सरकार यह जानकारी दे कि लखनऊ के प्राथमिक स्तर के अस्पतालों (सीएचसी एवं पीएचसी) में वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध है अथवा नहीं, तथा यदि है तो क्या वहां प्रशिक्षित कार्मिक तैनात हैं।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने वी द पीपल संस्था की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। न्यायालय ने कहा कि राजधानी के अस्पतालों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है, प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक अस्पताल।
कोर्ट ने यह भी कहा कि एसजीपीजीआई, केजीएमयू और लोहिया जैसे संस्थान मानकों के अनुसार न्यूनतम वेंटिलेटर संख्या रखते हैं, लेकिन यह देखा जाना आवश्यक है कि मरीजों की वास्तविक आवश्यकता इन मानकों से अधिक तो नहीं है।
न्यायालय ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया है कि लखनऊ खंडपीठ के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 16 जनपदों के सभी तीन स्तरों के अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता और आवश्यकता का आंकलन कर अगली सुनवाई तक रिपोर्ट दाखिल की जाए। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी।
