लखनऊ : पशुओं की जान से खिलवाड़ करने वालों पर दर्ज होगी एफआईआर
प्रशांत सक्सेना, लखनऊ, अमृत विचार : प्रदेशभर में चल रहे कथित एनजीओ और उनके दलालों से बीमार व घायल पशुओं को बचाने के लिए 'अमृत विचार' द्वारा चलाये गए अभियान को जिलाधिकारी विशाख जी ने गंभीरता से लिया है। शासन भी इस मसले पर गंभीर है। सोमवार को डीएम ने इस संबंध में एक बैठक कर मुख्य विकास अधिकारी अजय जैन और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेश कुमार को ऐसे लोगों को चिह्नित करके एफआईआर कराने के सख्त निर्देश दिए हैं।
इन अफसरों ने पशुओं की जान से खिलवाड़ करके धन उगाही करने वालों को चिह्नित कर उनके क्रियाकलापों का ब्योरा जुटा लिया गया है। पुलिस हर एक बिंदु की जांच करेगी।
पंजीकृत चिकित्सक हैं न कोई प्रशिक्षित प्रमाण पत्र धारक कर्मी
दरअसल, राजधानी समेत अन्य बड़े-छोटे जिलों में निराश्रित घायल व बीमार पशुओं की मदद करने के नाम पर कई कथित एनजीओ सक्रिय है। इनके संचालकों ने एनजीओ का पंजीयन तो करा रखा है लेकिन जीव जंतु कल्याण बोर्ड की गाइडलाइन का उल्लंघन कर स्वयं या फिर पशु का झोलाछाप से इलाज कराते हैं। शेल्टर होम बिना मानक के अस्पताल की तर्ज पर बनाए हैं। न पंजीकृत चिकित्सक हैं न कोई प्रशिक्षित व प्रमाण पत्र धारक कर्मचारी हैं। यह लोग घायल व बीमार पशुओं की फोटो-वीडियो बनाकर अपने व्हाट्सएप ग्रुपों में क्यूआर कोड के साथ शेयर करते हैं। पशु प्रेमियों से उपचार और शेल्टर होम में भेजने के लिए रुपये मांगते हैं। कई ऐसे दलाल की भूमिका में हैं जिनका कोई एनजीओ और शेल्टर होम नहीं है। वह बिना इलाज कराए ही फोटो व वीडियाे सोशल मीडिया पर शेयर करके रुपये इक्ट्ठा करते हैं।
नगर निगम व पशु चिकित्सक के पहुंचने पर कराते हैं विरोध
पशु चिकित्सक या नगर निगम की टीम सड़क पर घायल व बीमार पशुओं की मदद के लिए स्थल पर पहुंचती है तो कथित एनजीओ व उनके लोग स्थानीय लोगों को सरकारी सेवाएं खराब बताकर भड़काते हैं और उन्हीं से विरोध कराकर वापस करा देते हैं। क्योंकि पशुओं के ठीक होने या कान्हा गोशाला में जाने से उनकी वसूली बंद हो जाती है। बिना उपचार पशु के मरने का इंतजार करते हैं और मरने पर अंतिम संस्कार के लिए भी भावुक कर रुपये मांगते हैं। इसके लिए कई बड़े व्हाटसअप ग्रुप सक्रिय हैं।
नगर विकास मंत्री ने मांगा शेल्टर होमों का ब्योरा, निदेशक पशुपालन भी गंभीर
नगर विकास मंत्री एके शर्मा अमृत विचार के इस अभियान की गोवंशों से जुड़ी खबरें उन तक पहुंची तो बैठक करके प्रदेशभर के नगर निकाय क्षेत्रों में खुले शेल्टर होम का ब्योरा, पंजीकृत चिकित्सक व मानक समेत पूरा विवरण मांगा है। इधर, पशुपालन विभाग भी सक्रिय हो गया है। अभियान का संज्ञान लेकर निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र पशुपालन डॉ. मेमपाल ने भी सभी जिलों के सीवीओ को जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
पशुओं को ढोने के लिए ट्रांसपोर्टरों को जोनवार बांटा
कथित एनजीओ ने पशुओं को सड़क से उनके शेल्टर होम पर लाने के लिए ऑटो, ई-रिक्शा, लोडर, मैजिक समेत अन्य बड़े छोटे कैचिंग व वाहनों के स्वामी व चालकों को इसमें शामिल कर रहा है। इनके वाहन, चालक का नाम व मोबाइल नंबर जोनवार बांटकर सूची बनाई है। जिस एनजीओ को जरूरत होती है वह इस्तेमाल करता है। इसी तरह क्षेत्रों में उपचार के लिए पैरावेट लगे हैं।
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