मुरादाबाद: चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा महिला अस्पताल

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मुरादाबाद,अमृत विचार। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रही सरकार महिला अस्पताल में स्टाफ की कमी को भी पूरा नहीं कर सकी है। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक सहित मात्र चार स्त्री रोग विशेषज्ञ के सहारे इस अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराए जा रहे हैं। नतीजा यह है होता है, जब अस्पताल पर अधिक प्रसव का दबाव होता …

मुरादाबाद,अमृत विचार। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रही सरकार महिला अस्पताल में स्टाफ की कमी को भी पूरा नहीं कर सकी है। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक सहित मात्र चार स्त्री रोग विशेषज्ञ के सहारे इस अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराए जा रहे हैं।

नतीजा यह है होता है, जब अस्पताल पर अधिक प्रसव का दबाव होता है तो प्रसव के लिए आईं महिलाओं को दलाल भटकाकर निजी अस्पतालों में ले जाने में सफल हो जाते है। इसका परिणाम यह है कि जो लक्ष्य इस अस्पताल को दिया जाता है, उसमें वह पिछड़ा ही नजर आता है। इस साल शहर में 24 फीसदी प्रसव का लक्ष्य अधूरा रहा है।

जिले में शहरी क्षेत्र की स्वास्य सेवा को संस्थागत प्रसव का 18497 का लक्ष्य दिया गया था। उसके सापेक्ष 14117 प्रसव हो सके। मात्र 76.32 फीसदी ही प्रसव हो सके। महिला अस्पताल में मेटरिनिटी विंग को अब तक चालू नहीं किया जा सका। 78 बेड के महिला अस्पताल में जो पद एएनएम के होने चाहिए, उसमें भी चालीस फीसदी की कमी बताई जा रही है। यही नहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ के भी आधे से ज्यादा पद खाली हैं।

एक स्त्री रोग विशेषज्ञ पीटीसी से अटैच हैं। संविदा का स्टाफ नजर ही नहीं आता। वहीं एनेस्थेटिस्ट की संख्या भी अपर्याप्त है। दो रेडियोलॉजिस्ट होने चाहिए, पर एक ही पद भरा गया। ऐसे में स्थिति तब बिगड़ जाती है, जब कई महिलाएं इस अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती की जाती हैं। संख्या ज्यादा होने पर प्रसव में विलंब होता है। उसकी वजह से निजी अस्पतालों के दलालों को मौका मिल जाता है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारी, जो इस तरह के कार्यों में सक्रिय हैं, उनकी मदद से महिलाओं को निजी नर्सिंग होम में भर्ती कर मनमानी की जाती है। नतीजा यह है कि न ही सरकार की नीति पूरी हो पाती है और न ही सरकारी योजना का लाभ महिलाओं को मिल पाता है।

महिला अस्पताल की स्थिति
पद संख्या
स्त्रीरोग विशेषज्ञ 4 (सीएमएस सहित)
एनेस्थेटिस्ट 2 (चिकित्सा अधीक्षक सहित)
रेडियोलॉजिस्ट 1
बेड 78
एमसीएच विंग 100

कोरोना के चलते नहीं मिला एमसीएच विंग
कोरोना काल में महिला अस्पताल मेटरनिटी विंग को भी अभी तक महिला अस्पताल के लिए नहीं सौंपा गया। यह अस्पताल सौ बेड का है। इसके लिए अलग से स्टाफ भी नियुक्त किया जाना है। पर एमसीएच विंग में कोविड वार्ड तैयार होने के चलते इसे अभी महिला अस्पताल में शामिल नहीं किया गया।

संस्थागत प्रसव को लेकर हमेशा प्रयास रहता है। पहले की अपेक्षा अस्पताल में प्रसव ज्यादा हुआ है। यदि कोई स्वास्थ्य कर्मी किसी तरह के भ्रष्टाचार में हैं और वे संस्थागत प्रसव को लेकर रोड़ा बने हुए हैं तो उनके बारे में शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।- डा. मिलिंद चंद्र गर्ग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

स्टाफ काफी कम है। एएनएम के भी काफी पद खाली हैं और नर्स की संख्या में भी कमी है। चिकित्सकों की संख्या में कमी होने के कारण काफी दिक्कतें आती हैं। शासन को प्रस्ताव भेजा है, पास होता है तो नियुक्ति होंगी।-डा. द्रनवीर, चिकित्सा अधीक्षक, महिला अस्पताल

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